मध्य प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजातियाँ
प्रदेश में तीन विशेष पिछड़ी जनजाति यथा भारिया, बैगा एवं सहरिया निवास करती हैं।
- राज्य शासन द्वारा 11 विशेष पिछड़ी जनजाति विकास अभिकरणों का गठन किया गया जो मण्डला, बैहर (बालाघाट), डिण्डौरी, पुष्पराजगढ़ (अनूपपुर), शहडोल, उमरिया, ग्वालियर, (दतिया जिला सहित), श्योपुर (भिण्ड, मुरैना जिला सहित) शिवपुरी, गुना (अशोकनगर जिला सहित) तथा तामिया (जिला छिंदवाड़ा) में स्थित हैं।
- इन अभिकरणों में चिह्नांकित किए गए 2314 ग्रामों में विशेष पिछड़ी जनजातियों के 5.51 लाख व्यक्ति निवास करते हैं।
प्राधिकरण
- बैगा, भारिया एवं सहरिया प्राधिकरण
- सहरिया जनजाति विकास प्राधिकरण
- बैगा जनजाति विकास प्राधिकरण
- भारिया जनजाति विकास प्राधिकरण
- इन प्राधिकरणों से सम्पूर्ण राज्य में सामाजिक विकास सम्भव होगा।
- इन नवगठित राज्य स्तरीय प्राधिकरण में *एक अध्यक्ष (इन्ही जाति का) *तीन अशासकीय सदस्य (मनोनीत)
- इन प्राधिकरणों के कार्य क्षेत्र में वर्तमान में राज्य के विभिन्न जिलों में निवासरत समस्त पिछड़ी जनजाति (बैगा, भारिया तथा सहरिया) सम्मिलित हैं।
मध्य प्रदेश में घुमंतू जनजाति
मध्य प्रदेश की 51 जातियों को विमुक्त , घुमक्कड़ एवं अर्द्ध घुमक्कड़ जनजातियों में सम्मलित किया गया है।
इन जनजातियों की प्रमुख समस्या शैक्षणिक पिछड़ापन, आर्थिक विपन्नता एवं घुमक्कड़ प्रवृत्ति होने के कारण स्थायी आवास का न होना है।
इन जनजातियों के विकास व कल्याण हेतु मध्यप्रदेश शासन की अधिसूचना 22 जून 2011 द्वारा पृथक "विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जनजाति कल्याण विभाग का गठन किया गया।
जनजाति एवं उनके युवागृह
| जनजाति | युवागृह | |
|---|---|---|
| मुण्डा | गतिओरा | |
| भारिया | रंग-बंग | |
| मुड़िया, गोण्ड | घोटुल | |
| उराँव | धूमकुड़िया | |
| भुइयां | धांगर बांसा |

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