कोल जनजाति का धार्मिक एवं आर्थिक जीवन
धार्मिक जीवन
कोल जनजाति में देवी-देवताओं सम्बन्धी कई कथाएँ प्रचलित हैं जो उनके धार्मिक विश्वास से जुड़ी हुई हैं।
प्रमुख देवता
- शारदा माई
- बड़का देव
- सन्यासी देव
- घासी - घमसान
- वनसती देवी
- अहीर बाबा
- ठाकुर देव
शारदा माई
बघेलखण्ड क्षेत्र में कोल जनजाति द्वारा इनकी पूजा
बड़का देव
ये जनजाति महादेव की बड़का रूप में पूजा करती है।
सन्यासी देव
विभिन्न बाधाओं को गांव में प्रवेश पर रोक
घासी - घमसान
ये कोल जनजाति के पूर्वज हैं पुत्र कामना के लिए इनकी पूजा की जाती है।
वनसती देवी
वनस्पति देवी के रूप में इनकी पूजा
अहीर बाबा
- घर के सबसे बड़े देवता
- जमीन में मिट्टी के दो शिवलिंग जैसी आकृति बनाकर इनकी पूजा की जाती है।
ठाकुर देव
ग्राम देवता व ग्राम रक्षक ठाकुर देव के भाव बरुआ पर आते हैं। दैवीय आपदाओं से गांव की रक्षा
आर्थिक जीवन
- मुख्य व्यवसाय - कृषि
- वन उपज बिक्री एवं मजदूरी
- कोयले की खदानों में भी काम करते हैं।

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