कोल जनजाति की सामाजिक परंपराएं
- जन्म संस्कार
- विवाह
- मृत्यु संस्कार
जन्म संस्कार
कोल जनजाति में लड़के के जन्म को शुभ माना जाता है, जन्म के 12वें दिन नामकरण किया जाता है इस दिन सोहर गीत गाए जाते हैं।
मुण्डन संस्कार
बच्चे के तीन वर्ष की अवस्था पूर्ण होने पर रामनवमी या वसंत पंचमी के दिन बच्चे का मुंडन संस्कार सम्पन्न किया जाता है।
विवाह/विवाह प्रथाएँ
- कोल जनजाति में प्रमुख विवाह मंगनी विवाह, राजी-बाजी विवाह, विधवा विवाह, विधवा विवाह, बहु विवाह आदि का प्रचलन हैं।
- कोल जनजाति में मंगनी विवाह को सर्वोत्तम माना जाता है।
- कोल जनजाति के विवाहों में क्षेत्र बहिर्विवाही नियम का पालन होता हैं जिसके कारण विवाह दूसरे गाँव से कुरही में होता है।
मृत्यु संस्कार
- कोल जनजाति में मृत्यु संस्कार में दाह संस्कार का प्रचलन है।
- कम उम्र के बच्चों व अविवाहितों को दफनाया जाता है।
- कोल जनजाति में महिलाएँ मृत्यु यात्रा में शामिल होती हैं।
गुदना कला
- कोल महिलाएँ गुदना प्रिय होती हैं इस जनजाति में गुदना कला एक प्रतीक चिन्ह के रूप में प्रयोग किया जाता है।
- इसमें महिलाएँ शरीर के अंगों जैसे - ठोंढ़ी, बाँह, हाथ, पैर पर गुदना गुदवाती हैं।
- गुदना लिखने वाली स्त्रियों को 'गोदनहार' कहा जाता है।

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