सहरिया जनजाति की सामाजिक संरचना एवं व्यवस्था

सहरिया जनजाति की सामाजिक संरचना एवं व्यवस्था

  • परिवार
  • उपजातियां
  • निवास
  • खान-पान
  • वस्त्र एवं आभूषण
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परिवार

  • सहरिया जनजाति पितृवंशीय जनजाति है इनमे एकल एवं संयुक्त दोनो परिवार का प्रचलन है।
  • इनकी पारिवारिक ईकाई को कुटुम्ब कहा जाता है।
  • इनके परिवार में घर का मुखिया पिता या सबसे बड़े सदस्य होते है।

उपजातियां एवं गोत्र

  • सहरिया जनजाति को इनकी उत्पत्ति के आधार पर तीन उपजातियों में बाँटा गया है - शबर, सवर और सौर।
  • सहरिया समाज में गोत्र प्रचलन मौजूद है तथा ये अनेक गोत्रों में विभाजित है- इसमें एक गोत्र के लोगों को कुटुम्बी, गोती, सगोती या भाई बन्दी कहलाते है।
  • सहरिया जनजाति को गोत्रों के आधार पर तीन वर्गों में विभाजित किया गया है जो लड़िया, उड़िया और कालापिठिया। कालापीठ (उड़ीसा में जगन्नाथ रथ को खींचने वाले)
  • इसके अतिरिक्त सहरिया जनजाति में अन्य प्रमुख गोत्र नकटेले, पलिया (पलोइया), सनोरिया (सन्नौरिया), उमरिया, भिलौड़िया (भीलोइया), पारौदिया, बरोतिया, सौलकिया (सोलंकी), डांगिया आदि प्रमुख है।

सामाजिक संगठन

  • सहरिया जनजाति में जातीय पंचायत का महत्व है इनके गांव 'सहराना' में पंचायतों की बैठकें होती हैं। सहरिया अपनी समस्याओं का समाधान पंचायत के माध्यम से ही करते हैं।
  • सहरिया पंचायत में पटेल कोटवार, बराई, भोपा, हथनारिया और परधान होते है।
  • सहरिया का मुखिया पटेल होता है जिसे खूंटिया पटेल भी कहते हैं।

सहरिया पंचायत

पंचायत का मुखिया पटेल होता है इसकी नियुक्ति पीढ़ी दर पीढ़ी होती है।
  • परधान : परधान का कार्य पंचायत जोड़ने, निर्णय सुनाने, दण्ड वसूली आदि का है इनकी नियुक्ति भी परम्परागत रूप से होती है।
  • बराई : यह संदेश वाहक होता है।
  • भोपा : यह तंत्र-मंत्र झाड़ फूंक का काम करता है इसे गोठिया भी कहा जाता है।
  • हथनरिया : यह सहरिया का वैद्य होता है, इसे जड़ी बूटियां और मंत्र का अच्छा ज्ञान होता है।

गांव/निवास

  • सहरिया जनजाति समूह में निवास करती है इनके निवास को सहराना कहते हैं
  • सहरिया जनजाति के घर घास फूस लकड़ी और मिट्टी से बने होते हैं।
  • इनके घरों की बनावट अंग्रेजी के अक्षर उल्टे यू (∩) के आकार की होती है।
  • इनके घरों में अनाजों को रखने के लिए मिट्टी की बड़ी-बड़ी कोठी होती है जिसे पेंई कहते हैं।

खान-पान

  • सहरिया भोजन में मोटे अनाज का प्रयोग करते हैं जिसमें ज्वार बाजरा मक्का आदि मुख्य भोजन है।
  • सहरिया जनजाति में शराब पीना भी प्रचलित है।

वस्त्र एवं आभूषण

  • सहरिया जनजाति नाम मात्र के वस्त्र पहनते है। पुरूष मुख्य रूप से रंगीन कमीज और साफा तथा महिलाएँ लहंगा, घागरा, लुगरा व सलूका पहनती हैं।
  • सहरिया जनजाति की वेशभूषा पर राजस्थानी प्रभाव देखा जा सकता है महिलाएँ आभूषण प्रिय होती है।
  • सहरिया महिला पीतल, एल्युमीनियम आदि के आभूषण का प्रयोग करती है।

पुरुषों के आभूषण
कान में छैलकड़ी, मुरकी, झेला, गोखडू
हाथ में कडूल्या
गले में कंठी, गोप, चौसर
उंगली में बीठी
अंगूठों में
(पैर के)
अँगूठी
कमर में सूतना, कनकत

स्त्रियों के आभूषण
सिर में बोर, राखड़ी, किलीप
कान में फीकर-पना, गुट्टी एटन, बाली
नाक में लौंग ( सोने- चाँदी के
गले में खंगवारी, खंगाड़ी, वजट्‌टी, कठला, लड़
भुजा में / बाँह बटा, बाजू, कड़ा
हाथ में चूड़ा, बंगड़ी, डार, ढाढ़, पोंची, हथफूल
पटेलिया, शीशफूल
कमर में करधौनी, कनकती, कमर लच्छा, चपेटा
पैरो में चाँदी की कड़ी, छागल, आँवले, तोड़िया
गरेठी, तोड़ा, टणका, पायजेब
उंगली मे
(पैर)
फोलरी, विछिया
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को MPPSC, MPESB (Vyapam), MP Police, Patwari, Forest Guard और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।