सहरिया जनजाति की सांस्कृतिक परंपराएं एवं मान्यताएँ
- नृत्य एवं गान
- उत्सव एवं पर्व
- भाषा
- धार्मिक जीवन
प्रमुख नृत्य
- स्वांग नृत्य
- दुल-दुल घोड़ी
- तेजाजी
- रागनी नृत्य
- फाग नृत्य
- लहंगी नृत्य
लोकगीत
इस जनजाति का प्रमुख गीत लांगुरिया है जिसे भुजरिया पर्व पर श्रावण माह में गाया जाता है।
हल्दी गीत, बन्ना गीत को विवाह के अवसर पर गाया जाता है।
उत्सव एवं पर्व
सहरिया जनजाति हिन्दू धर्म के काफी करीब है इनके प्रमुख त्यौहार होली, दीपावली, दशहरा, देवउठनी, ग्यारस आदि महत्वपूर्ण है।
भाषा
सहरिया जनजाति कोलेरियन परिवार की जनजाति है ये कोलेरियन या मुंडारी भाषा बोलते है।
धार्मिक जीवन
- सहरिया हिन्दू देवी देवताओं की भी पूजा करते है इनमे माता सीता का सर्वाधिक महत्व है, जिन्हे सहरिया आराध्य देवी के रूप में मानते है
- ये जनजाति प्रकृतिवाद, जीववाद एवं बहुदेववाद में विश्वास करते हैं तथा तंत्र-मंत्र एवं आत्मा में भी आस्था रखते है।
प्रमुख देवी-देवता
- ठाकुर देव
- हीरामन देव
- भैरों देव
- कारस देव
- नहर देव
- तेजाजी महाराज
- परित देव
सहरिया जनजाति के प्रमुख देवी देवता
ठाकुर देव
- बच्चों व घोड़ी की रक्षा करने वाले
- इनको दारु व बकरी की बलि चढ़ाई जाती है।
भैरव देव
- संतान प्राप्ति के लिए इनकी अराधना (महिलाद्वारा)
- नवरात्र समाप्ति पर इनको आंगन में झूला झुलाया जाता है।
नरसिंह देव
संतान प्राप्ति के लिए इनकी पूजा चैत्र शुक्ल दशमी को की जाती है।
कारस देव
सांप या बिच्छू काटने पर विष मुक्ति के लिए इनकी पूजा
भूमिया देव
ये गांव की रक्षा करते हैं।
तेजाजी महराज
तेजाजी की पूजा मध्यप्रदेश के मालवा निमाड़ ग्वालियर अंचल में इनकी पूजा
हीरामन देव
साप काटने पर विष मुक्ति के लिए इनकी पूजा
कंकाली माता
महामारी से बचने के लिए इनकी पूजा
दरेठ देव
निसंतान दम्पत्ति को संतान देने वाले की पूजा की जाती है।
नहर देव
- नहर का अर्थ है शेर
- शेर की पूजा व मान्यता का चलन इस जनजाति में है।
जिंद/जिन्न
भूत-प्रेत से बचने के लिए ये जनजाति इनकी पूजा करती है।
आर्थिक जीवन
- आर्थिक दृष्टि से कमजोर तथा कृषि व वन उपज पर निर्भर
- प्रायः ये भूमिहीन होते हैं तथा बटाईदार के रूप में कृषि कार्य करते हैं।
- जड़ी-बूटी से औषधि बनाना भी इनका एक प्रमुख कार्य है।
सहरिया जनजाति से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
- सहरिया जनजाति मध्य प्रदेश की तीन अत्यन्त पिछड़ी जनजातियों में से एक है।
- सहरिया जनजाति में कन्या जन्म को शुभ माना जाता है।
- सहरिया जनजाति जड़ी बूटी पहचानने में विशेषज्ञ मानी जाती है।
- सहरिया स्वयं को भील का छोटा भाई कहलाने में गौरवान्वित महसूस करते हैं।
- सहरिया अत्यन्त प्राचीन जनजाति है जिसका उल्लेख महाभारत, रामायण व पुराण आदि में मिलता है।
- सहरिया संग्रहालय की स्थापना श्योपुर में की गई है।
- सहरिया मध्य प्रदेश की पांचवी बड़ी जनजाति है।
- सहरिया जनजाति का सामुदायिक रेडियो केन्द्र श्योपुर जिले में है।

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