सहरिया जनजाति
- परिचय
- भौगोलिक विस्तार
- उत्पत्ति
- जनसंख्या
- शारीरिक विशेषता
परिचय
- सहरिया जनजाति मध्य प्रदेश की अत्यन्त पिछड़ी जनजातियों में से एक है जो आज भी अपने आदिम पहचान के लिए जानी जाती है।
- सहरिया जनजाति द्रविड़ समूह या कोलेरियन परिवार से संबंधित है।
- सहरिया जनजाति का विस्तार मध्य प्रदेश के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में है।
भौगोलिक विस्तार
- सहरिया जनजाति मध्य प्रदेश के श्योपुर, शिवपुरी (सर्वाधिक संकेन्द्रण), गुना, राजगढ़, विदिशा अशोकनगर, टीकमगढ़, निवाड़ी, भिंड आदि जिलों में पाई जाती है।
- सहरिया जनजाति मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, छत्तीसगढ़ तथा उड़ीसा राज्य में भी पाई जाती है।
- सहरिया जनजाति को मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे - गुना में रावत या राउत तथा विंध्य क्षेत्र में सोसिआ आदि।
उत्पत्ति
- सहरिया शब्द फारसी भाषा के शब्द 'सहरा' से बना है जिसका अर्थ जंगल होता है यह जनजाति जंगलों में निवास करने के कारण सहरिया कही जाती है।
- सहरिया शब्द का एक अन्य अर्थ शेर के साथ रहना होता है।
- सहरिया कोलेरियन परिवार की जनजाति मानी जाती है।
- सहरिया स्वयं को महर्षि वाल्मीकि की संतान मानते हैं।
- सहरिया भील जनजाति को अपना भाई या सहोदर मानती है।
- सहरिया की उत्पत्ति की कथा शबरी से भी संबंधित है तथा ये अपना संबंध निषाद और लवकुश से भी जोड़ते हैं।
- ऐतरेय ब्राह्मण में सहरिया जनजाति को विश्वामित्र का वंशज कहा गया है।
- डा. टी बी नायक ने अपनी पुस्तक 'द सहरिया' मोनोग्राफ में सहरियाओं के इतिहास के बारे में बताया है।
जनसंख्या
- सहरिया जनजाति की कुल जनसंख्या मध्यप्रदेश में लगभग 4.17 लाख है।
- इनकी सर्वाधिक जनसंख्या शिवपुरी और श्योपुर जिले में है।
शारीरिक विशेषता
- सहरिया जनजाति का रंग काला, बाल सीधे और शरीर औसत होता है।
- अत्यधिक शराब और संतुलित भोजन के अभाव में अधिकांश सहरिया बीमारी से ग्रसित हैं।

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