अन्य प्रमुख जनजातियां
अगरिया जनजाति
- विशेष उद्यम वाली गोंडो की उपशाखा
- इस जनजाति के व्यक्ति लोहा गलाने का काम करते हैं
- अगरिया जनजाति का नाम अग्नि से उत्पन्न माना जाता है।
भौगोलिक विस्तार
- मध्य प्रदेश के अनूपपुर, मण्डला, बालाघाट, शहडोल सीधी, सिंगरौली, डिंडौरी, उमरिया आदि जिलों में निवास करती है।
- मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश व झारखण्ड आदि राज्यों में भी पाई जाती है।
उपजातियां
- मुख्य उपजातियां पथरिया, अगरिया और खूंटिया अगरिया
- पथरिया अगरिया लोहे को पत्थर पर रखकर हथौड़ी से पीटकर उपकरण बनाता है
- खूंटिया अगरिया - जो लोहे को खूंटी पर रखकर गर्म कर लोहे को पीटकर उपकरण बनाता हैं।
शारीरिक विशेषता
- प्रोटो आस्ट्रेलायड समूह से संबंधित
- कद मध्यम, रंग काला, नाक चौड़ी, बाल घुंघराले व आंखे छोटी।
निवास
- पहाड़ी क्षेत्रों में घास फूस से बने मकानों में
खान-पान
- शाकाहारी व मांसाहारी दोनो
- कोदो, कुटकी मक्का आदि अनाजों का प्रयोग
वस्त्र एवं आभूषण
- पुरुष - गमछा, धोती व बंडी
- महिलाएँ - साड़ी
- पुरुष व महिला दोनो नकली गिलट व चांदी के आभूषण का प्रयोग करते हैं।
परिवार
- पितृसत्तात्मक समाज
- एकल व संयुक्त परिवार प्रणाली का प्रचलन
विवाह
- घुसपैठ विवाह, सहपलायन विवाह, विधवा पुनर्विवाह का प्रचलन
- विधवा विवाह व बहुपत्नी विवाह का भी प्रचलन
देवी देवता
- प्रमुख देवी देवता - बूढ़ा देव, लोहासुर (इनका निवास स्थान धधकती भट्टी है) ठाकुर देव, दूल्हा देव, शीतला माता आदि।
- लोहासुर को काली मुर्गी की बलि चढ़ाई जाती है।
- जादू टोने व भूत प्रेत में भी विश्वास
महत्वपूर्ण पर्व व उत्सव
- प्रमुख त्यौहार - नवाखानी, दशहरा, होली, कर्मा पूजा, जावरा विदरी आदि
गीत
- ददरिया गीत, सुआ गीत, करमा गीत।
भिलाला जनजाति
- परिचय - भील जनजाति की उपशाखा। उजला भील भी कहते हैं।
- भौगोलिक विस्तार - धार, झाबुआ, अलीराजपुर, रतलाम, बड़वानी, खरगोन।
- शारीरिक विशेषता - कद ऊंचा, रंग गोरा, नाक चपटी, बाल सीधे।
- उपजातियां - ओखे, पटेलिया व बलिया।
- परिवार - पितृ सत्तात्मक। एकल व संयुक्त परिवार।
- खान-पान - शाकाहारी व मांसाहारी दोनो। मोटे अनाज जैसे मक्का का प्रयोग।
- सामाजिक संगठन - पंचायत का मुखिया गांव का वरिष्ठ व्यक्ति।
- कोटवार - गांव से संबंधित प्रशासनिक सूचना उपलब्ध कराता है।
- विवाह - पलायन विवाह, सेवा विवाह, परीक्षा विवाह।
- उत्सव व पर्व - दिवाली, जन्माष्टमी, होली, दिवासा, ग्यारस।
- नृत्य - घूमर नृत्य।
- धार्मिक जीवन - देवी शीतला माता। बड़वा भिलालाओं का प्रमुख धार्मिक व्यक्ति।
भिलाला जनजाति से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- भिलाला जनजाति में जन्म के पहले दिन बच्चे को केवल शहद दिया जाता है जिसे कोपटे कहा जाता है।
- विवाह प्रक्रिया में मध्यस्थ को मानगड़िया कहा जाता है।
- इस जनजाति में मृत्यु संस्कार में 'नुकता की प्रथा' तथा तीरथ भोजन का प्रचलन है।
- बड़वा भिलालाओं का प्रमुख धार्मिक व्यक्ति होता है यह औषधि तथा झाड़ फूँक का कार्य करता है।
पनिका जनजाति
- परिचय - मध्य प्रदेश की पिछड़ी जनजाति
- भौगोलिक विस्तार - सीधी, शहडोल, अनूपपुर
- उत्पत्ति - उत्पत्ति देवी से मानते है। पनिका जनजाति कबीर पंथी है।
- शारीरिक विशेषता - रंग काला, कद मध्यम, बाल हल्के घुंघराले व आंखें काली
- उपजातियां/उपवर्ग - शक्ति, साकेत, पनिका, कबीरपंथी
- परिवार - पितृ सत्तात्मक। एकल व संयुक्त परिवार
- विवाह - लामसैना विवाह, घुसपैठिया विवाह, पलायन विवाह, देवर-भाभी विवाह विधवा पुनर्विवाह
- खान-पान - मुख्य भोजन - पेज, उड़द, मूंग, चावल। मांस - मदिरा का सेवन नही
- धार्मिक जीवन - दूल्हा देव, बूढ़ी माता, सूर्य। धार्मिक गुरु मैंती
- नृत्य - करमा नृत्य, परधौनी, झरपत
- भाषा - गोंडी व छत्तीसगढ़ी
- उत्सव एवं पर्व - नवरात्र, दशहरा, दिवाली, होली, जावारा
पनिका जनजाति से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
- पनिका वस्त्र निर्माण करने वाली जनजाति है इनको बुनकर भी कहा जाता है।
- पनिका जनजाति कई गोत्रों में विभाजित है जिसे कुर कहा जाता है कई कुर मिलकर कुरहा बनतें हैं।
- पनिका जनजाति का धार्मिक गुरु मैंती कहलाता हैं।
कंवर जनजाति
- भौगोलिक विस्तार - अनूपपुर, सीधी, शहडोल व सिंगरौली
- जनसंख्या - कुल जनसंख्या 18603
- उत्पत्ति - कंवर महाभारत के कौरव से
- परिवार - पितृवंशी। एकल परिवार
- उपजातियां - क्षत्रिय, तवार, चेरवा, दूध कंवर, पैंकरा।
- गोत्र - बलवा, चन्द्रमा, चावर, चिता, दर्पण, दूध कंवर
- निवास - मकान मिट्टी व लकड़ी
- खान-पान - शाकाहारी व मांसाहारी। मुर्गी का मांस व शराब का सेवन नही
- वस्त्र व आभूषण - सामान्य वस्त्र का प्रयोग। आभूषण के शौकीन
- नृत्य - प्रमुख नृत्य बार नृत्य। इसके अलावा भोजली, सुआ, कर्म, रहस।
- उत्सव व पर्व - नवाखानी, दुर्गा नवमी, दशहरा, पोला, जन्माष्टमी
- विवाह - गोरावट व विनिमय विवाह, घर जमाई विवाह, पुनर्विवाह
- आर्थिक जीवन - कृषि व पशुपालन, वन उपज संग्रह व मजदूरी। फौज के कार्य को अपना परंपरागत कार्य मानती है।
कंवर जनजाति से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
- कंवर जनजाति के पंचायत में प्रत्यक्ष शासन चलता है इसमे ग्राम प्रधान को 'कुरहा' तथा पंचायत का मुखिया सरपंच होता है।
- जाति पंचायत के प्रमुख को 'गोटिया' कहते हैं।
- इस जनजाति में सात - आठ गावों की पंचायत को चक पंचायत कहते हैं
- सात उपजातियों की पंचायत को 'सतगढ़िया पंचायत' कहते हैं।
उरांव जनजाति
- उरांव या कुरूख भारत की एक प्रमुख जनजाति है
- यह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सीमा में पाई जाती है।
भौगोलिक विस्तार
मध्य प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र अर्थात मण्डला, डिंडौरी, सिंगरौली, शहडोल, भोपाल, नरसिंहपुर, बड़वानी, जबलपुर, इन्दौर तथा अनूपपुर में पाई जाती है।
उत्पत्ति
- द्रविड़ परिवार की जनजाति जिसका मूल स्थान दक्षिण भारत माना जाता है।
- इस जनजाति के लोग धाँगड़, धनका या किसान आदि नाम से भी जाने जाते हैं।
उपजातियां
- धनका, धाँगड़, उरांव तथा कोड़ा
प्रमुख गोत्र
- इक्का, लकड़ा, टोप्पो, किंडो, तिर्की, मिन्ज, बेक, खल्को आदि।
निवास
- मिट्टी और लकड़ी से बने घर।
सामाजिक व्यवस्था
- पंचायत व्यवस्था का प्रमुख महतो होता है।
- कई पंचायत मिलकर परहा पंचायत बनाती है जिसका प्रमुख परहा राजा कहलाता है। गांव के पुजारी को बैगा कहा जाता है।
- उरांव जनजाति की युवा गृह संस्था धूमकुड़िया या धूमकोरिया कहलाती है।
खान-पान
- शाकाहारी व मांसाहारी दोनों
मुख्य भोजन
- चावल, पैज, उड़द दाल आदि
- ये जनजाति चावल की शराब बनाती है जिसे 'हंडिया' कहा जाता है।
विवाह
बुंदे विवाह (वधू मूल्य), बन्दवा विवाह (राजी-मर्जी से), ढुकू विवाह (लड़की द्वारा चयनित) विधवा विवाह आदि पाए जाते हैं।
वस्त्र एवं आभूषण
- पुरुष - धोती गमछा
- महिलाएँ - लुगड़ा व पोलका
नृत्य
- सरहुल, धुंडिया, डंडा, कर्म सैला आदि प्रमुख नृत्य
उत्सव एवं पर्व
- सरहुल, दशहरा, दिवाली, सरना पूजा, कर्म पूजा कुलदेव पूजा आदि।
धार्मिक जीवन
- प्रमुख देवी-देवता : सूर्य, हनुमान, अधेरीपाठ, चंडी आदि
- जादू-टोना पर विश्वास
परधान जनजाति
- मध्य प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में पाई जाने वाली महत्वपूर्ण जनजाति
- यह सतपुड़ा क्षेत्र, नर्मदा घाटी तथा बघेलखण्ड क्षेत्र में निवास करती है।
- परधान संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है मंत्री
- परधान जनजाति गौंड राजाओं के मंत्री हुआ करते थे जो उनकी प्रशस्ति गाया करते थे।
- इनकी भाषा गोंडी है
- परधान जनजाति की एक उपशाखा को पटेरिया नाम से भी जाना जाता है
- परधान जनजाति की आजीविका का साधन संगीत है।
खैरवार जनजाति
- यह जनजाति मध्य प्रदेश के उमरिया, सीधी, शहडोल, मण्डला, अनूपपुर, पन्ना, दमोह आदि जिले में निवास करती है।
- खैर वृक्ष से कत्था बनाने के कारण इस जनजाति को खैरवार जनजाति कहा जाता है।
- यह मुण्डा समूह की जनजाति है।
- मूल स्थान - कैमूर पहाड़ी
- इस जनजाति को खेरुआ तथा कोंदआर भी कहा जाता है।
- पंचायत के मुखिया को महतो मांझी कहते हैं।
मुड़िया जनजाति
यह जनजाति मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ में पाई जाती है परन्तु सीमित मात्रा में मध्य प्रदेश में भी पाई जाती हैं।
उपजातियां
- अबूझमड़िया व बाथसन हॉर्न मड़िया
वधू मूल्य का प्रचलन
प्रमुख नृत्य
- गौर नृत्य। इसके अलावा छेड़ता एवं पंडवानी का भी प्रचलन है।
- मुड़िया जनजाति की युवा गृह संस्था को घोटुल कहा जाता है।
कोरवा जनजाति
- मुख्यतः छत्तीसगढ़ में तथा कुछ संख्या में मध्य प्रदेश में भी।
- मूल स्थान - छोटा नागपुर का पठार
- ये जड़ी बूटी के अच्छे जानकार माने जाते हैं।
- पंचायत को मयारी कहा जाता है जिसका प्रमुख मुखिया होता है।
- ये स्थानांतरित कृषि करते हैं जिसे बोआरा खेती कहा जाता है।
बिंझवार जनजाति
- मध्य प्रदेश के बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, मण्डला आदि जिलों में निवास करती है।
- इस जनजाति का मूल क्षेत्र विंध्याचल है जिसके आधार पर इसका नाम बिंझवार पड़ा है
- प्रमुख देवी - विंध्यवासिनी देवी
- यह जनजाति विंध्याचल के बारहभाई बेटकर को अपना पूर्वज मानती है।
उपजातियां
- विरझिया, बिसिया, विंझवार व सोनझोर
मातृभाषा
- छत्तीसगढ़ी
मवासी जनजाति
- यह कोरकू जनजाति की उपजाति है।
- मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बैतूल जिले व महाराष्ट्र के कुछ जिलों में पाई जाती है।
- 2011 की जनगणना के अनुसार इनकी जनसंख्या 109180 है।
हल्बा जनजाति
- हलबी या हल्बा भारत का एक आदिवासी समुदाय है।
- यह ज्यादातर मध्यप्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र राज्यों में पाई जाती है।
- हल्बा जनजातियाँ 17वीं शताब्दी में बस्तर राज्य के प्रमुख व सबसे प्रभावशाली जनजातीय समूहों में से एक थी।
- मध्य प्रदेश के बालाघाट, लाजीगढ़ , छिंदवाड़ा, सिवनी व मण्डला जिले के कुछ क्षेत्रों में हल्बा जनजाति पाए जाते हैं।
धानुक जनजाति
यह मध्य प्रदेश के भिण्ड, मुरैना, उज्जैन, रतलाम आदि जिलों में निवास करती है।
सौर/शौर जनजाति
यह जनजाति मध्य प्रदेश के सागर, दमोह व छतरपुर जिलों में निवास करती है।
माझी
- मध्य प्रदेश के रीवा, भोपाल, ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना, जबलपुर व इन्दौर में निवास।
- 2011 जनगणना के अनुसार इनकी जनसंख्या 50655 है।
बियार जनजाति
- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ व सीधी जिले में पाई जाती है।
- राज्य में इस जनजाति की जनसंख्या 10000 से भी कम है।
बिरहोर जनजाति
यह मुख्यतः झारखण्ड की जनजाति। मध्य प्रदेश में यह शहडोल जिले में अधिवासित है।
कोलम जनजाति
यह जनजाति मूलतः नागपुर विदर्भ की जनजाति है जो मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा , बालाघाट और सिवनी जिलों में निवास करती है।
भिम्मा जनजाति
यह मध्य प्रदेश की घुमंतू जनजाति है जो गोण्ड की उपजाति मानी जाती है। मध्य प्रदेश में यह शहडोल , बालाघाट , मण्डला व डिण्डौरी जिलों में पाई जाती है।
पाओ जनजाति
यह जनजाति मध्य प्रदेश के शहडोल, अनूपपुर व सतना में निवास करती है।
पारधी जनजाति
आखेट (शिकार) करने वाली जनजाति जो बंदरों का शिकार करती है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें