बघेलखण्ड के लोकनृत्य
- दादर नृत्य
- कैहरा नृत्य
- केमाली नृत्य
- कलसा नृत्य
- बिरहा नृत्य
दादर नृत्य
- पुरुषों द्वारा खुशी के अवसर पर।
- ढोलक, शहनाई, ढोल व ढप आदि वाद्य यन्त्रों का प्रयोग।
- मुख्यत: कोल, कोटवार एवं कहार जनजाति द्वारा।
कैहरा नृत्य
- पर्व एवं त्यौहार पर स्त्री व पुरुष दोनों अलग-अलग शैली में नृत्य।
- फुरहरी मुद्रा में (हाथ पकड़कर घेरा) नृत्य।
- बाँसुरी की धुन पर नृत्य। बारी जनजाति में लोकप्रिय नृत्य।
केमाली नृत्य
- केमाली गीत की जवाब शैली पर आधारित, विवाह के अवसर पर।
- साजन - सजनी नृत्य।
कलसा नृत्य
- अहीरों, गुप्ता एवं गड़रियों द्वारा।
- धोती एवं बण्डी पहनकर सिर पर साफा बांधकर नृत्य।
- इसमें पुरुष या स्त्री सिर पर सात घड़े रखकर नृत्य करते हैं।
बिरहा नृत्य
- पुरुष प्रधान नृत्य, स्त्रियां भी सम्मिलित होती हैं।
- ढोल व टिमकी वाद्य यन्त्रों का प्रयोग। अहिराई नृत्य भी कहते हैं।

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