घुमंतू जातियाँ
घुमंतू जातियों से तात्पर्य ऐसी जातियों से है जिनका एक निश्चित निवास क्षेत्र नही होता है तथा वे अपनी आजीविका और जीवन यापन के लिए वर्ष भर एक स्थान से दूसरे स्थान पर विचरण करते रहते हैं।
इस क्रम में वे कई बार कुछ स्थानों पर थोड़े समय के लिए रूकते भी हैं और कुछ दिनों बाद दूसरे स्थानों के लिए निकल पड़ते हैं।
अक्सर ये समुदाय समूह के रूप में विचरण करते हैं। सामान्यतः घुमंतू लोग कबीलाई परम्परा से रहते हैं। मध्य प्रदेश के इस समुदाय के अन्तर्गत कुछ जातियाँ निवास करती हैं जिनमें बंजारा समुदाय सबसे प्रमुख है।
मध्य प्रदेश में विमुक्त घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जनजातियां
- मध्य प्रदेश की 51 जातियों को विमुक्त घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जनजातियों में सम्मिलित किया गया है।
- विमुक्त जाति दिवस 31 अगस्त को मनाया जाता है।
- इन जनजातियों की प्रमुख समस्या शैक्षणिक पिछड़ापन, आर्थिक रूप से विपन्नता एवं घुमक्कड़ प्रवृत्ति होने के कारण स्थायी आवास न होना है।
विमुक्त घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जनजातियां
बलदिया, बाछोवालिया, भाट, भन्तु, देसर, दुर्गी, मुरागी, घिसाड़ी, गोन्धली ईरानी, जोगी, कनफटा जोशी, जोशी हरदा, जोशी नदिया, जोशी हरबोला, जोशी पिंगला काशी कापड़ी, लोहार पिट्टा, नायकड़ा, शिकलिगर (बरघिया, सैगुलगोर, सरानिया) , सिद्धन, बनीयन्थर, राजगोंड, रेबारी (पशुपालक), गोलर, गोसाँई, भराडी, हरदास, हरबोला, हेजरा, धनगर।
विमुक्त जातियां
कंजर, सांसी, बंजारा, बनछड़ा, मोघिया, कालबेलिया, भानमत, बगरी, नट पारधी, बेदिया, हाबुड़ा, भाटू, कुचबंदिया, बिजोरिया, कबूतरी, सन्धिया पासी, चन्द्रवेदिया, बैरागी, सनोरिया

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