हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता)

हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता)

हड़प्पा सभ्यता काँस्य युगीन एवं ताम्रपाषाणिक संस्कृति है।
वर्ष 1921 में दयाराम साहनी ने सर्वप्रथम हड़प्पा नामक स्थल की खोज की इसी कारण इसे हड़प्पा सभ्यता कहा गया।
यह सभ्यता लगभग 7000 ई. पू. मेहरगढ़ (पाकिस्तान, बलूचिस्तान) क्षेत्र में नव पाषाणकालीन गावों के प्रारम्भिक चरण के साथ धीरे-धीरे अस्तित्व में आई।

काल निर्धारण

  • इस सभ्यता के कालक्रम निर्धारण में विद्वानों में एक मत नहीं है। कार्बन-14 (C-14) डेटिंग पद्धति के आधार पर इसका काल 2350 ई. पू. से 1750 ई. पू. माना गया है।
  • कंकालों के परीक्षण से यह निर्धारित हुआ है कि सिंधु सभ्यता में चार प्रजातियाँ (भूमध्य सागरीय, आस्ट्रेलायड, अल्पाइन व मंगोलायड) निवास करती थीं।
  • इनमें सर्वाधिक लोग भूमध्य सागरीय प्रजाति के थे।
हड़प्पा संस्कृति को विभिन्न चरणों में विभाजित किया गया है-
चरण महत्वपूर्ण स्थल विशेषताएँ
प्रारम्भिक हड़प्पा हड़प्पा, कोटदीजी, अमरी किलेबन्दी, ग्रिड योजना, शिल्प विशेषज्ञता
परिपक्व हड़प्पा मोहनजोदड़ो, हड़प्पा,
कालीबंगन, धौलावीरा
लेखन प्रारम्भ, कलाकृति में एकरूपता
विकसित व्यापार
उत्तर हड़प्पा हड़प्पा, रोजड़ी, सीसवाल ग्राम पद्धति का विकास

सिन्धु सभ्यता के प्रमुख स्थल

1. हड़प्पा
  • स्थिति: रावी नदी, मोण्टगोमरी पाकिस्तान
  • खोजकर्ता: दयाराम साहनी (1921)
  • विशेष तथ्य: श्रमिक निवास, सोलह भट्टियाँ, काँसे की छरिया, छः अन्नागार, मंजूषा बर्तन पर चित्र, उर्वरता की देवी आदि।

2. मोहनजोदड़ो
  • स्थिति: सिन्धु नदी, लरकाना पाकिस्तान
  • खोजकर्ता: राखाल दास बनर्जी (1922)
  • विशेष तथ्य: मृतकों का टीला, स्नानागार, काँसे की नग्न नर्तकी, सूती कपड़ा, दाढ़ी वाला साधु, हाथी का कपाल खण्ड, पशुपति के अंकन की मुहर।

3. सुत्कागेंडोर
  • स्थिति: दाश्क नदी, बलूचिस्तान
  • खोजकर्ता: ऑरेल स्टाइन (1927), जार्ज डेल्स (1962)
  • विशेष तथ्य: तटीय चौकी, राख से भरा बर्तन, ताँबे की कुल्हाड़ी, मिट्टी की चूड़ियां, बेबीलोन से व्यापार का साक्ष्य।

4. आमरी
  • स्थिति: सिन्धु नदी, सिन्ध पाकिस्तान
  • खोजकर्ता: एन. जी. मजूमदार (1929) व जार्ज एफ.डेल्स
  • विशेष तथ्य: पहला स्थल जहाँ पूर्व हड़प्पा सभ्यता के चिह्न व परिवर्ती चरण की पहचान, बारहसिंगा का नमूना।

5. चन्हूदड़ो
  • स्थिति: सिन्धु नदी, सिन्ध पाकिस्तान
  • खोजकर्ता: एन. जी. मजूमदार (1931)
  • विशेष तथ्य: मुहर उत्पाद केन्द्र, मिट्टी की बैलगाड़ी, कांसे का खिलौना, दवात, लिपिस्टिक का साक्ष्य, मनके का कारखाना, वक्राकार ईंटें।

6. कालीबंगा
  • स्थिति: घग्घर नदी, राजस्थान
  • खोजकर्ता: अमलानंद घोष (1953-60)
  • विशेष तथ्य: हल द्वारा जुते खेत, बेलनाकार मुहर, पक्की मिट्टी का हल, भूकम्प का साक्ष्य, ऊंट की हड्डियां, कच्ची व अलंकृत ईंट, काले रंग की चूड़ी।

7. कोटदीजी
  • स्थिति: सिन्धु नदी, सिन्ध पाकिस्तान
  • खोजकर्ता: फजल अहमद (1953-54) व धुर्ये
  • विशेष तथ्य: पत्थर की नींव वाले घर, गहनों का जखीरा, चाक पर निर्मित मृदभाण्ड।

8. देसलपुर
  • स्थिति: ध्रुद नदी, कच्छ
  • खोजकर्ता: ए. घोष (1963)
  • विशेष तथ्य: टेराकोटा, तांबा मुहर, सेलखड़ी मुहर व भूरे रंग के मिट्टी के बर्तन।

9. रोपड़
  • स्थिति: सतलज नदी, पंजाब
  • खोजकर्ता: यज्ञदत्त शर्मा (1953-54)
  • विशेष तथ्य: 1947 के बाद हड़प्पाकालीन उत्खनन स्थल, ताँबे की कुल्हाड़ी, शंख की चूड़ियाँ, कुत्ते को मालिक के साथ दफनाने का साक्ष्य।

10. आलमगीरपुर
  • स्थिति: हिण्डन नदी (उत्तर प्रदेश)
  • खोजकर्ता: यज्ञदत्त शर्मा (1958)
  • विशेष तथ्य: रोटी बेलने की चौकी, कटोरे के टुकड़े, मिट्टी के बर्तन, गंगा-यमुना दोआब का पहला उत्खनित स्थल।

11. धौलावीरा
  • स्थिति: लूनी नदी, कच्छ
  • खोजकर्ता:  जे. पी. जोशी (1959), आर. एस. विष्ट (1990-91)
  • विशेष तथ्य: सफ़ेद कुआँ, खेल का मैदान, जल संचयन प्रणाली, साइनबोर्ड, पत्थर की नेवले की मूर्ति।

12. राखीगढ़ी
  • स्थिति: घग्घर नदी, हरियाणा
  • खोजकर्ता: सूरजभान (1969)
  • विशेष तथ्य: प्राक् व परिपक्व हड़प्पा के साक्ष्य, अन्नागार व रक्षा प्राचीर का साक्ष्य।

13. बनावली
  • स्थिति: सरस्वती नदी, हिसार
  • खोजकर्ता: सूरजभान (1964), आर. एस. विष्ट (1973)
  • विशेष तथ्य: मिट्टी के मनके, मिट्टी के हल, जौ, सोना परखने की कसौटी, वास्तविक हल के टूटे हुए टुकड़े, अपवहन तंत्र का अभाव।
harappa-sabhyata-sthal

हड़प्पा सभ्यता की विशेषताएँ

नगर योजना
  • हड़प्पा व मोहनजोदड़ो दोनों नगरों के अपने-अपने दुर्ग थे, जहाँ शासक वर्ग के लोग रहते थे
  • सड़कें एक दूसरे को समकोण पर काटती थी प्रत्येक नगर दो भागों में विभक्त थी - पश्चिमी टीले (इनमें किले व दुर्ग) और पूर्वी टीले (आवास क्षेत्र)
  • पानी निकासी के लिए सड़कों के बगल स्लेब से ढकी नालियाँ
  • घरों के दरवाजे मुख्य सड़क की ओर न खुलकर गलियों में खुलते थे।
  • मकान बनाने में कई प्रकार की ईंटों का उपयोग होता था किन्तु सबसे प्रचलित आकार 4:2:1 का था ।
  • स्टुअर्ट पिग्गट ने हड़प्पा नगर को अर्द्ध औद्योगिक नगर कहा है।

आर्थिक स्थिति

कृषि
  • लोथल तथा रंगपुर से चावल, लोथल व सौराष्ट्र से बाजरे व रोजदी से रागी के साक्ष्य, दो फसलों की खेती, हल का प्रयोग, गेहूँ व जौ इनके मुख्य खाद्यान्न थे।
  • कालीबंगा से जुते हुए खेत एवं बनावली से मिट्टी के हल जैसे खिलौना प्राप्त।
  • जल संग्रह के लिए बांधों का निर्माण, सबसे पहले कपास उगाने का श्रेय इन्हीं लोगों को।

पशुपालन
  • भैंस, गाय, भेड़, बकरी, कुत्ते, बिल्ली, खच्चर आदि का पालन किया जाता था।
  • कुबड़ वाला साड़ सबसे प्रिय पशु था, हाथी व गैंडे से भी परिचित।
  • आमरी से प्राप्त एक मुहर में बारहसिंघा का प्रमाण।

वाणिज्य एवं व्यापार
  • व्यापार विनिमय प्रणाली का साक्ष्य, प्रमुख व्यापारिक नगर - बालाकोट, डाबरकोट, मुण्डीगाक

उद्योग एवं शिल्पकला
  • इस सभ्यता की विशाल इमारत में राजगिरी का प्रमाण।
  • नाव बनाने के साक्ष्य।
  • धातुओं से मूर्तियाँ बनाने के लिए मोम सांचे विधि।
  • चांदी सर्वप्रथम इसी सभ्यता में पाई गई।
  • कांस्य कला, मृण्मूर्तियाँ, मनका व मुहर निर्माण कला प्रचलित।

मापतौल
  • माप की प्रणाली दशमलव थी बाट घनाकार-वर्तुलाकार, बेलनाकार, शंक्वाकार व ढोलाकार थे।
  • तुला का साक्ष्य सुरकोटडा से मिलता है।
  • मोहनजोदड़ो से सीप तथा लोथल से हाथी दांत से निर्मित पैमाना मिला है।

मुहरें व लिपि
  • चौकोर मुहरें जिनपर अधिकतर लेख व भैंस, बाघ, बकरी व हाथी की आकृतियाँ
  • सर्वप्रथम लेखन प्रणाली का विकास मेसोपोटामियों के लोगों द्वारा क्युनीफार्म लिपि में
  • सिन्धु लिपि में मूलत: 64 मूल चिन्ह है इस लिपि का सबसे पुराना नमूना अलेक्जेंडर कनिंघम को 1853 ई. में मिला किन्तु यह अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी।
  • सिन्धु सभ्यता से प्राप्त मुहरों पर पीपल वृक्ष की प्राप्ति होती है।
सैंधव सभ्यता का व्यापार
धातु / वस्तुएँ स्थल क्षेत्र
सोना अफगानिस्तान, फारस, कर्नाटक
चाँदी ईरान, मेसोपोटामिया
ताँबा खेतड़ी, बलूचिस्तान
टिन ईरान, अफगानिस्तान
शिलाजीत हिमालयी क्षेत्र
लाजवर्द बदख्शाँ (अफगानिस्तान), मेसोपोटामिया
स्लेट कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
सीसा ईरान, राजस्थान, दक्षिण भारत

धार्मिक विधि

  • ये लोग मानव, पशु व वृक्ष तीनों रूपों में ईश्वर की पूजा करते थे।
  • यज्ञ से परिचित व पुनर्जन्म में विश्वास, पृथ्वी को उर्वरता की देवी मानकर पूजा
कुछ प्रमुख धार्मिक प्रतीक:
प्रतीक महत्व
एक श्रृंग शिव का रूप
स्वास्तिक सूर्य उपासना का प्रतीक
बैल शिव का वाहन
योगी शिव योगीश्वर
बकरा बलि के लिए
नाग पूजा के लिए
भैंसा शत्रुओं पर देवताओं की विजय का प्रतीक

अंतिम संस्कार
  • पूर्ण समाधिकरण - (शव को जमीन मे दफनाना)
  • आंशिक समाधिकरण - (शव को खुले में पक्षियों, जानवरों के लिए छोड देते बाद में हड्डियों को दफनाया जाता था)
  • दाह संस्कार (शव को जला कर राख को दफनाया जाता था)

राजनीतिक स्थिति

  • मध्यम वर्गीय जनतांत्रिक
  • धर्म की प्रमुखता

सामाजिक स्थिति

  • मातृसत्तात्मक समाज
  • दास प्रथा का प्रचलन
  • आभूषणों का चलन

सिन्धु सभ्यता का पतन: विभिन्न मत

इतिहासकार पतन का कारण
चाइल्ड एवं व्हीलर बाह्य व आर्यों के आक्रमण से
एम आर साहनी भूगर्भिक परिवर्तन, जल प्लावन
के. यू. आर. कनेडी प्राकृतिक आपदा
लैम्ब्रिक नदियों का मार्ग परिवर्तन
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को MPPSC, MPESB (Vyapam), MP Police, Patwari, Forest Guard और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।