कोरकू जनजाति की सामाजिक परंपराएं
- जन्म संस्कार
- विवाह
- मृत्यु संस्कार
जन्म संस्कार
कोरकू जनजाति में शिशु जन्म को उत्सव के रूप में मनाया जाता हैं। इन लोगों में नामकरण संस्कार लड़की का तीसरे दिन व लड़के का पांचवें दिन होता है।
सामान्यतः बच्चा जिस दिन पैदा होता है उसी दिन के आधार पर बच्चों का नामकरण किया जाता है।
विवाह एवं विवाह प्रथाएँ
कोरकू जनजाति में विवाह प्रथा में लमझना प्रथा या घर दामाद प्रथा, चिथौड़ा प्रथा, राजी-बाजी प्रथा, हठ विवाह प्रथा, अंतर्विवाह प्रथा प्रचलित हैं।
कोरकू जनजाति के प्रमुख विवाह
- लमझना प्रथा (घर दामाद प्रथा) - इसमें लड़का अपने ससुराल में रहकर सेवा का कार्य करता है।
- चिथौड़ा प्रथा - इस प्रथा में गांव का कोरकू पटेल गांव से दो व्यक्तियों को विवाह की बातचीत के लिए लड़के के घर भेजता है। जाने वाले ये व्यक्ति चिथौड़ा लेकर कन्या पक्ष के यहाँ जाता है चिथौड़ा प्रथा कहलाती है इसमें लड़के का पिता लड़की के पिता को दहेज देता है।
- राजी बाजी प्रथा - इस विवाह में युवा युवती अपनी पसंद से विवाह करते हैं
- विधवा विवाह - कोरकुओं में तलाक और विधवा विवाह प्रचलित है कोरकू एक से अधिक पत्नी रख सकते हैं।
मृत्यु संस्कार
मृत्यु संस्कार में सिडौली प्रथा प्रचलित है। मृतकों को दफनाऐं जाने की प्रथा तथा मृतक की स्मृति में लकड़ी का एक स्तम्भ गाड़ते हैं जिसे मण्डो या मण्डा कहा जाता है।

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