कोरकू जनजाति की सांस्कृतिक परंपराएं/धार्मिक जीवन/आर्थिक जीवन

कोरकू जनजाति की सांस्कृतिक परंपराएं

  • नृत्य
  • उत्सव एवं पर्व
  • भाषा
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नृत्य

  • डंडा नाच
  • ठाठ्या नाच
  • गादली नृत्य
  • चिल्लुडी नृत्य

कोरकू जनजाति के प्रमुख नृत्य
  • देव दशहरा नृत्य - चैत्र माह में पडियार द्वारा धाम गति पर किये जाने वाला नृत्य
  • डंडा नाच - जिरौती त्यौहार पर पुरूष प्रधान नृत्य
  • चिल्लुडी नाच - कुआर माह में युवतियों द्वारा किया जाने वाला समूह नृत्य
  • गादली नृत्य - शादी विवाह के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य
  • चाचरी नृत्य - चैत्र मास में किये जाने वाला पुरुष प्रधान नृत्य
  • ढाढला नाच - कोरकुओं का सबसे प्रिय नृत्य, यह पांच प्रकार का होता है टाड़ा, पडौप, भील, मिडीकू और चाचरीज ढाढला
  • ठाठ्या नृत्य - दीपावली को किया जाने वाला नृत्य
  • थापटी नृत्य - स्त्री प्रधान समूह नृत्य, इसे चिटकोरानाथ भी कहते हैं

उत्सव एवं पर्व

प्रमुख त्यौहार - गुड़ी पड़वा, दशहरा, जिरोति, माघ दशहरा, आखातीज, डोडबलि, पाला, दीवाली, होली आदि।

गुड़ी पड़वा
  • चैत्र माह के नववर्ष का त्यौहार
  • नीम की पत्ती व गुड़ खाने की प्रथा

देव दशहरा
  • देवी देवताओं से संबंधित त्यौहार
  • पड़वा से दशहरा तक मनाया जाने वाला

जिरोती
श्रावण मास की हरियाली अमावस्या को मनाया जाता है।

दीपावली
'कार्तिक माह की अमावस्या' पड़वा को यह त्यौहार मनाते हैं।

आखातीज
चैत्र माह का त्यौहार

माघदशहरा
कार्तिक मास का त्यौहार

पोला
इसमें बैलों की पूजा होती है

डोडबली
ज्येष्ठ माह का त्यौहार

होली
  • सजनई-फगनई गीत का चलन
  • फागुन मास का त्यौहार

सिडोली पर्व
पूर्वजों की याद में मनाया जाता है

भाषा एवं बोली

  • प्रमुख भाषा - मुण्डा, हो एवं संथाली
  • इनकी बोली आस्ट्रिक भाषा परिवार की है जिसे 'मुण्डा भाषा परिवार' कहते हैं।

धार्मिक जीवन

  • स्वयं को हिन्दू मानते हैं तथा महादेव व चंद्रमा की पूजा करते हैं।
  • प्रमुख देवता - डोंगर देव, भटुआ देव एवं गांव के देव
  • होली के अवसर पर रावण की पूजा

कोरकू जनजाति के प्रमुख देवी-देवता

मेघनाथ
यह जनजाति दशहरे के आसपास मेघनाथ खंब की पूजा करती है

महादेव पूजा
महादेव को पिता मानकर उनकी आराधना

खनेरा देव
ये गांव वासियों की विभिन्न बीमारियों से रक्षा करते हैं

खेड़ा देव
पशु-पक्षी व खेती के देवता

किलार मुठवा
विपत्ति से बचने के लिए इनकी पूजा की जाती है।

जादू-टोना/तंत्र-मंत्र

  • पड़ियार - जादू टोना व जड़ी बूटी के जानकार लोग
  • पशुओं की बलि प्रथा प्रचलित (वर्ष में 2 बार)
  • जादू टोना करने वाली महिलाएँ - भगरो - डुकरी

आर्थिक जीवन

  • आजीविका का मुख्य साधन - कृषि, आखेटन, मत्स्य पालन एवं वन उपज संग्रह
  • खेतों में काम करने वाले को 'कोरकू भाग्या' कहा जाता है।

कोरकू जनजाति से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • कोरकू राजपूत को अपना पूर्वज मानते हैं।
  • कोरकू के निवास को ढाना कहते हैं।
  • इनके द्वारा आग जलाने के लिए चकमक पत्थर का प्रयोग किया जाता है।
  • कोरकू जनजाति में जंगल काटकर खेती करने वाले को बदलवा खेती कहते हैं।
  • कोरकू स्वयं को रावण का वंशज मानते हैं।
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को MPPSC, MPESB (Vyapam), MP Police, Patwari, Forest Guard और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।