कोरकू जनजाति - परिचय, भौगोलिक विस्तार, जनसंख्या, उत्पत्ति, विशेषता | korku janjati

कोरकू जनजाति

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  • भौगोलिक विस्तार
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  • विशेषता
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परिचय

कोरकू जनजाति दक्षिणी मध्य प्रदेश में पाई जाने वाली महत्वपूर्ण जनजाति है। कोरकू मुंडा अथवा कोल जनजाति से संबंधित हैं।
कोरकू जनजाति प्रोटो-आस्ट्रेलायड प्रजाति का प्रतिनिधित्व करती है (उमाशंकर मित्र के अनुसार)
यह जनजाति विंध्य एवं सतपुड़ा के जंगलों में जड़े खोदने का कार्य करती है जिससे इन्हे कोरकू कहा जाता है।

भौगोलिक विस्तार

  • कोरकू जनजाति सतपुड़ा पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाती है
  • इसका विस्तार मध्य प्रदेश के बैतूल, छिंदवाड़ा, होशंगाबाद, हरदा, नर्मदापुरम, खण्डवा, देवास, सीहोर, सिवनी व बुरहानपुर आदि जिलों में है।

जनसंख्या

  • कोरकू जनजाति की कुल जनसंख्या 730847 है यह प्रदेश की कुल जनजाति जनसंख्या का 4.7% है
  • मध्य प्रदेश की कोरकू जनजाति की सर्वाधिक संख्या खण्डवा व बुरहानपुर जिले में हैं।

उत्पत्ति

  • कोरकू का शाब्दिक अर्थ होता है 'मानव का समूह'। कोरकू जनजाति आस्ट्रिक वंश से संबंधित है।
  • कोरकू स्वयं को रावण का वंशज मानते हैं।
  • कोरकू कोलेरियन परिवार की जनजाति हैं जो राजपूतों को अपना पूर्वज मानती है।
  • कोरकू जनजाति के अनुसार यह अपनी उत्पत्ति महादेव द्वारा उत्पन्न किए गए मूला और मुलाई से मानते हैं।

शारीरिक विशेषता

कोरकू का रंग काला, नाक चपटी, ओंठ मोटा तथा चेहरा गोल होता है। इनका शरीर हस्त-पुष्ट एवं बाल घुघराले होते हैं।
शारीरिक विशेषताओं के आधार पर कोरकू मुण्डा तथा कोलेरियन जनजाति के समान माने जाते हैं।
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Kartik Budholiya

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मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को MPPSC, MPESB (Vyapam), MP Police, Patwari, Forest Guard और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।