मध्य प्रदेश के कला क्षेत्र से संबंधित प्रमुख जनजातीय व्यक्तित्व
पेमा फत्या
- जन्म - झाबुआ (म.प्र.) प्रसिद्ध पिथौरा चित्रकार
- भील समुदाय के पहले कलाकार जिन्होंने कैनवास को एक माध्यम के रूप में प्रयोग करके संग्रहालय और गैलरी के लिए कला बनाई।
- 1986 में शिखर सम्मान।
- 2017 में तुलसी सम्मान 2020 में निधन (झाबुआ)।
जनगढ़ सिंह श्याम
- जन्म डिंडोरी जिले के पाटनगढ़ गांव में, 1962 में परधान गोंड परिवार में।
- इन्हें 'जंगल कलाम' नामक भारतीय कला के नए स्कूल के निर्माता का श्रेय।
- इनकी प्रसिद्ध प्रदर्शनी पेरिस में मैजिशियन्स डे ला टेरे (1989), नई दिल्ली में ज्योतिंद्र जैन द्वारा क्यूरेटेड अन्य मास्टर्स (1998)।
- 1988 की कृति लैंडस्केप विद स्पाइडर, 2010 में सोथबीज, न्यूयार्क में 31250 डालर में बिकी जो किसी आदिवासी कलाकार के लिए पहली बार थी।
- कला में कागज व कैनवास का प्रयोग।
भूरी बाई
- भील कलाकार।
- जन्म - झाबुआ।
- पहली कलाकार जिन्होनें कला में कागज प्रयोग किया।
- भोपाल आदिवासी लोककला अकादमी में एक कलाकार के तौर पर कार्य करती हैं।
- मध्य प्रदेश सर्वोच्च शिखर सम्मान (1986-87) प्राप्त हो चुका है।
- वर्ष 1998 में अहिल्या सम्मान।
जोधइया बाई
- इनकी कलात्मक शैली की तुलना जनगढ़ सिंह श्याम से की गई है।
- 2022 में नारी शक्ति पुरस्कार।
- 2023 में पद्मश्री।
अर्जुन सिंह धुर्वे
- प्रसिद्ध लोकनर्तक।
- 2022 में पद्मश्री।
भज्जू सिंह श्याम
- द लंदन जंगल बुक (2004) से विशिष्ट पहचान।
- 2018 - पद्मश्री 'द लाइफ ऑफ ट्रिप नाइट' पुस्तक के लिए।
- 2006 में बोलोग्ना चिल्ड्रेन बुक फेयर से सम्मानित।
दुर्गा बाई व्योम
- गोंड शैली की कलाकार।
- 2022 में पद्मश्री।
कलावती श्याम
- गोंड महिला चित्रकार।
- मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ अलग हुआ तो मध्य प्रदेश का नया नक्शा बनाया जिसे अब्दुल कलाम द्वारा विमोचित किया गया।

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