मध्यप्रदेश की जनजाति से संबंधित ऐतिहासिक व्यक्तित्व | madhya pradesh ki janjati se sambandhit aitihasik vyaktitva

मध्यप्रदेश की जनजाति से संबंधित ऐतिहासिक व्यक्तित्व

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संग्रामशाह (1482 - 1532 ई.)

  • संग्रामशाह का वास्तविक नाम अम्हणदास था।
  • संग्रामशाह गोंडवाना साम्राज्य के महान शासक हुए इनका शासनकाल गोंड साम्राज्य के लिए स्वर्ण युग के समान था।
  • कर्नल स्लीमन के अनुसार संग्रामशाह के अधीन 52 गढ़ थे।
  • गुजरात के शासक बहादुर शाह के रायसेन अभियान (1531) में सहायता देने के कारण अम्हणदास को बहादुर शाह ने संग्रामशाह की उपाधि दी।
  • संग्रामशाह ने अपने शासन काल में सोने, चांदी व तांबे के सिक्के में स्वयं को "पुलत्स्यवंशी" बताया है।
  • इन्होंने चौरागढ़ किला, सिंगौरगढ़ का दुर्ग, संग्रामपुर नगर आदि का निर्माण करवाया।
  • संग्रामशाह ने संस्कृत भाषा में "रसरत्न माला" की रचना की है।

रानी दुर्गावती

  • गोण्डवाना साम्राज्य की शासिका।
  • इनका विवाह संग्रामशाह के पुत्र दलपतशाह से हुआ था
  • दलपतशाह की मृत्यु के बाद दुर्गावती ने पुत्र वीर नारायण को शासक बनाकर उसकी संरक्षिका बन गई।
  • दुर्गावती ने अफगान मियाँ व मालवा शासक बाज बहादुर को पराजित किया।
  • रानी ने गढ़ा के समीप रानीताल व आधारताल का निर्माण करवाया।
  • रानी दुर्गावती ने गोण्डवाना साम्राज्य की सुरक्षा के लिए अकबर द्वारा भेजे गए आसिफ खान से नरई का युद्ध लड़ा एवं मातृभूमि के लिए बलिदान दे दिया।
  • दुर्गावती की समाधि जबलपुर के समीप बरेला में स्थित है।
  • मध्य प्रदेश सरकार ने इनके सम्मान में "रानी दुर्गावती विश्व विद्यालय" की स्थापना की है।
  • 5 अक्टूबर 2023 को प्रधानमंत्री द्वारा जबलपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती स्मारक व उद्यान की आधारशिला रखी जो 21 एकड़ क्षेत्र में विस्तृत होगा इसमें रानी दुर्गावती की 52 फुट ऊंची कांस्य की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

राजा शंकर शाह

  • शंकर शाह रानी दुर्गावती के वंशज और अन्तिम गोण्ड शासक।
  • 1783 ई. में जन्म, पिता का नाम सुमेर शाह।
  • 1857 की क्रान्ति में राजा शंकर शाह व उनके पुत्र रघुनाथ शाह ने अंग्रेजों के विरुद्ध भाग लिया था।
  • 1857 की क्रान्ति में भाग लेने के कारण लेफ्टिनेंट क्लार्क ने राजा शंकर शाह व उनके पुत्र रघुनाथ शाह को बंदी बनाकर जेल में डाल दिया जिसके बाद उनकी पत्नी फूल कुंवर देवी ने क्रान्ति का नेतृत्व किया।
  • 18 सितम्बर 1857 को शंकर शाह व रघुनाथ शाह को तोप से बांधकर उड़ा दिया गया।
  • राजा शंकर शाह के सम्मान में छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम बदलकर राजा शंकर शाह विश्व विद्यालय कर दिया।
  • शंकर शाह व रघुनाथशाह के क्रान्ति संघर्ष को वनवासी क्रान्ति कहा जाता है।
  • मध्य प्रदेश में 2008 से इन दोनों की स्मृति में शंकर शाह व रघुनाथ शाह पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
  • 18 सितम्बर को प्रतिवर्ष बलिदान दिवस मनाया जाता है।

रघुनाथ शाह

रघुनाथ शाह अंतिम गोण्ड शासक राजा शंकर शाह के पुत्र थे।
अपने पिता के साथ 1857 की क्रान्ति में भाग लिया जिसके बाद इनको जबलपुर के समीप तोप से बांधकर उड़ा दिया गया।

रानी कमलापति

  • रानी कमलापति भोपाल की अंतिम हिन्दू रानी मानी जाती है।
  • जन्म - सीहोर रियासत के राजा कृपाल सिंह सारौतिया के यहाँ।
  • विवाह- गिन्नौरगढ़ के राजा निजाम शाह के साथ।
  • पुत्र - नवल शाह
  • निजाम शाह ने भोपाल में कमलापति महल का निर्माण कराया।
  • निजाम शाह की मृत्यु के बाद चैन शाह ने गिन्नौरगढ़ किले पर आक्रमण किया, तब रानी ने अपनी सुरक्षा के लिए दोस्त मोहम्मद खान से सहायता मांगी।
  • रानी कमलापति ने जल समाधि लेकर अपने प्राणों को त्याग दिया था।
  • भारत सरकार ने इनके सम्मान में हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति स्टेशन कर दिया है।

रानी फूल कुंवर

  • गोंड शासक शंकर शाह की पत्नी।
  • शंकर शाह की मृत्यु के बाद इन्होने 1857 की क्रान्ति का नेतृत्व किया।
  • जबलपुर में फूलपुर तालाब का निर्माण किया।
  • महिला पॉलिटेक्निक मण्डला का नाम परिवर्तित कर उसका नाम फूलकुंवर पॉलिटेक्निक कर दिया।

भीमा नायक

  • जन्म - 1840 ई० में बड़वानी जिले के पंच मोहाली गांव में
  • पिता - धन सिंह
  • माता - सुरती बाई
  • इन्होने 1857 की क्रान्ति में मालवा व निमाड़ क्षेत्रों में अंग्रेजों से संघर्ष किया।
  • इनको निमाड़ क्षेत्र का राबिनहुड कहा जाता है।
  • इन्होने अम्बा पानी के युद्ध में अंग्रेजों को पराजित किया।
  • अंग्रेजों ने इन्हे छलपूर्वक सतपुड़ा के जंगलो से गिरफ्तार करके पोर्ट ब्लेयर में काला पानी की सजा दी।
  • 29 दिसम्बर 1876 को फांसी।
  • इनका स्मारक बड़वानी व सिलावट मार्ग पर धुआवा बावड़ी नामक गांव में स्थित है।
  • इनका नारा - "जय हो जोहर हो लड़ाई आर-पार हो" है।

भीमा नायक और अंग्रेजों के मध्य लड़ाई

  • 24 अगस्त 1857 - पंच वासल की लड़ाई
  • 11 अप्रैल 1857 - अंबापानी की लड़ाई
  • 4 फरवरी 1859 - धावाबावड़ी की लड़ाई
  • 9 फरवरी 1859 - पंचबावली की लड़ाई 

टंट्या भील

  • जन्म - 1842 ई. पूर्वी निमाड़ के बड़दा गांव में।
  • वास्तविक नाम - तांतिया भील।
  • इन्होंने अंग्रेजों के शोषण और लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई।
  • ये अंग्रेजों व उनके समर्थकों से लूटे धन को आम जनता में बांट देते थे।
  • अंग्रेजों ने इन्हें इंडियन राबिन हुड की उपाधि दी।
  • आदिवासी इन्हे प्रेम से टंट्या मामा कहते थे।
  • ये गोरिल्ला युद्ध के महारथी थे व 1857 ई. में अंग्रेजों के विरुद्ध आवाज उठाई।
  • अंग्रेजों द्वारा 1888-89 में गिरफ्तार कर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया।
  • 4 दिसम्बर 1889 को फांसी
  • इनकी समाधि - इंदौर के पातालपानी में
  • मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आदिवासी खिलाड़ी को जननायक टंट्या भील राज्य स्तरीय पुरस्कार दिया जाता है।
  • सरकार द्वारा खरगौन जिले में सूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा।
  • पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर टंट्या भील स्टेशन तथा इंदौर का भंवरकुआं चौराहा अब टंट्या भील चौराहा कर दिया गया है।

खाज्या नायक

  • जन्म - 1830 ई. में निमाड़ क्षेत्र के सेंधवा घाट के सांगली ग्राम में
  • पिता - गुमान नायक
  • 1857 की क्रान्ति में निमाड़ क्षेत्र में आदिवासियों का

नेतृत्व
  • 1858 में बड़वानी सिलावद के बीच स्थित अम्बापानी गांव में अंग्रेजी व भीली सेना के बीच युद्ध में खाज्या नायक के पुत्र दौलत सिंह शहीद हो गए।
  • कर्नल आउट्रम ने 1860 में नायक को धोखे से बंदी बनाकर मौत के घाट उतार दिया।
  • मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 11 अप्रैल को खाज्या नायक शहीद दिवस मनाने की घोषणा।

बिरसा गोंड

  • नर्मदा घाटी क्षेत्र के गोंड जनजाति के प्रमुख नेता।
  • भारत छोड़ो आन्दोलन में इन्होनें रेल पटरियाँ उखाड़ी व थानों में आग लगा दी।
  • पुलिस गोलीबारी में गोली लगने से शहीद।

गजन सिंह कोरकू

  • जन्म - बैतूल जिले के घोड़ा डोंगरी के छतरपुर ग्राम में।
  • गांधीवादी विचारक व आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी।
  • सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान इन्होने 1930 ई० में जंगल सत्याग्रह का आयोजन किया जिसे टुरिया जंगल सत्याग्रह भी कहा जाता है।
  • जंगल सत्याग्रह के दौरान इनके साथी बंजारी सिंह कोरकू ने अपने प्राण दे दिए थे।

विष्णु सिंह उइके

जन्म - बैतूल
भारत छोड़ो आन्दोलन में घोड़ा डोंगरी शाहपुर क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था।

बादल भोई

जन्म - 1845 में, छिंदवाड़ा के डूंगरिया में छिंदवाड़ा जिले के जन क्रान्तिकारी नेता।
इनके नाम पर छिंदवाड़ा में बादल भोई आदिवासी संग्रहालय की स्थापना।

बंजारी सिंह कोरकू

गजन सिंह कोरकू के सहयोगी।
घोड़ा डोंगरी सत्याग्रह में प्राणों का बलिदान।

देवी सिंह गोंड

जबलपुर क्षेत्र के मालगुजार।
1857 की क्रान्ति में भाग लिया इसमें अलगपुर की 52वीं इन्फेंट्री के विद्रोही सैनिकों ने इनका साथ दिया।
सहयोगी - पुत्र गिरवर सिंह व अंबापानी नवाब आदिल मोहम्मद खान

महिपाल सिंह गोंड

जबलपुर के जागीरदार
1857 की क्रान्ति में इन्होनें रानी अवंती बाई का साथ दिया था।

निहाल सिंह कोरकू

नेमावर के सिकंदरी खेड़ा के मालगुजार
1842 में बुन्देला विद्रोह के दौरान कोरकुओं को संगठित कर अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया।

रघुनाथ सिंह मण्डलोई

टाण्डा बरुद के निवासी तथा स्थानीय भील व भिलाला समुदाय के प्रतिष्ठित नेतृत्वकर्ता।
अक्टूबर 1858 में बीजागढ़ में बन्दी बनाए गए उसके बाद कोई भी जानकारी प्राप्त नहीं है।

इमरत भोई सरेआम

जन्म 1836 ई० में मालेगांव में
1857 की क्रान्ति में तात्या टोपे का सहयोग किया।

राम गोण्ड

जन्म - बैतूल में 1930 के जंगल सत्याग्रह में भाग लिया।

दिलराज सिंह गोंड

1842 के बुन्देला विद्रोह में भाग लिया।

राजा अमन सिंह गोंड

गोसलपुर निवासी, 1857 विद्रोह में भाग लिया।

शिवराज सिंह गोण्ड

सागर के जागीरदार।
1842 के बुंदेला विद्रोह में राजा पारिछत को सहयोग किया था।

अन्य महत्व पूर्ण आदिवासी नेता

नाम क्षेत्र आन्दोलन
रणजोर सिंह गोंड सुठल्ला बुंदेला विद्रोह
सरवर सिंह गोंड भोपाल 1857 की क्रान्ति
हीरालाल चौधरी जबलपुर 1857 की क्रान्ति
सीता राम कंवर निमाड़ 1857 की क्रान्ति
जनक सिंह कोरकू घोड़ा डोंगरी जंगल सत्याग्रह
टपरू भोई कुण्डली ग्राम 1857 की क्रान्ति
बकस भाऊ मण्डला 1857 की क्रान्ति
सीताराम कंवर मालवा 1857 की क्रान्ति
दुलारे गोण्ड सागर 1857 की क्रान्ति
रेनो बाई बैतूल घोड़ा डोंगरी सत्याग्रह
सोनी बाई गोण्ड मण्डला 1932 का लगान बंदी आन्दोलन
राजा अर्जुन सिंह फतेहपुर बुंदेला विद्रोह
महासिंह गोण्ड महाकौशल जबलपुर भारत छोड़ो आन्दोलन
मुक्को बाई मण्डला टुरिया जंगल सत्याग्रह
गंधू सिंह गोण्ड डिंडौरी असहयोग आन्दोलन
मंगरू गनु उइके मण्डला भारत छोड़ो आन्दोलन
उम्मेर सिंह गोंड खुरई 1857 की क्रान्ति
बिरजू नायक बड़वानी 1857 का विद्रोह
जग्गू सिंह उइके बैतूल जंगल सत्याग्रह
भेड़ो सिंह गोंड घोड़ा डोंगरी भारत छोड़ो आन्दोलन
मंसू ओझा बैतूल भारत छोड़ो आन्दोलन
सहरा भोई छिंदवाड़ा अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष 1859
झनका भोई छिंदवाड़ा 1857 की क्रान्ति
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को MPPSC, MPESB (Vyapam), MP Police, Patwari, Forest Guard और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।