मध्य प्रदेश में चित्रकला शैलियाँ
मध्य प्रदेश के रियासत कालीन चित्रकला में विभिन्न चित्रकला शैलियों का विकास हुआ जिनमे कुछ प्रमुख -
मालवा शैली
इस चित्रकला की शुरूआत वाघ की गुफाओं में चित्रित शैली से माना गया है।
यह जैनधर्म के कल्पसूत्र चित्रण से प्रेरित है।
इस चित्रकला शैली पर 15वीं शताब्दी में वैष्णव और श्रीनाथ सम्प्रदाय का प्रभाव।
यह चित्रकला मूलतः मालवा क्षेत्र में प्रचलित है।
ग्वालियर शैली
इस चित्रकला शैली का विकास तोमर राजाओं द्वारा किया गया।
शिवाजी राव सिंधिया ने चित्रकारों के लिए चितेरा ओली का निर्माण कराया।
अंग्रेजों के काल में भी इस शैली में संवर्धन और संरक्षण के पश्चात पटना शैली नामक नई शैली का विकास हुआ।
बुन्देली शैली
इस शैली का विकास दतिया के राजा शुंगजीत सिंह के संरक्षण में राजस्थानी शैली के प्रभाव स्वरूप विकसित हुई।
इसको बढ़ावा देने में चन्देल शासकों का विशेष योगदान।
प्रमुख केन्द्र : मध्यप्रदेश में ओरछा, तालबेहट, धुवेलाताल गुरसराय, आठभैयाजागीर, टोडीसमथर व अमरगढ़।
मध्य प्रदेश में जनजातीय लोक चित्रकला
| चित्रकला | संबद्ध जनजाति | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| ढोकरा कला | भारेवा समुदाय बैतूल |
• मोम व गोंद के मिश्रण से चित्रण • यह अलौह धातु शिल्प है। |
| डिगना चित्रकला | गोण्ड जनजाति | • शादी विवाह आदि अवसरों पर घर की दीवारों व फर्शों पर ज्यामितीय पैटर्न |
| पिथौरा चित्रकला | भील जनजाति | • पेमा फल्या व भूरी बाई से जुड़ी चित्रकला |
| नोहडोरा चित्रकला | बैगा एवं गोण्ड जनजाति |
• इसमें पशु पक्षी, फूल पत्तियाँ, पेड़-पौधों आदि का चित्रण |

Comments
Comment करें