राज्य की लोक चित्र कला
मध्य प्रदेश राज्य की लोक चित्र कला को चार भागों में विभाजित किया गया है-
- मालवा चित्रकला
- निमाड़ चित्रकला
- बुन्देलखण्ड चित्रकला
- बघेलखण्ड चित्रकला
मालवा चित्रकला
17 वीं. शताब्दी की प्रमुख चित्रण शैली, प्रमुख केन्द्र - मालवा, बुंदेलखण्ड।
इसमें समतल आकृतियों, काली एवं कत्थई, ठोस रंग खण्डों पर उभरी आकृति एवं सूखे रंग में चित्रित वास्तुकला का विशेष आकर्षण।
मध्य भारतीय चित्रकला भी कहते हैं।
प्रमुख उदाहरण
- माण्डना - हाथों की अंगुलियों से बनाया जाने वाला अलंकरण। इसे भूमिचित्र भी कहते हैं।
- सवनाही - श्रावण माह में हरितालिका पर्व पर गोबर से बनाए जाने वाले चित्र सवनाही कहलाते हैं। ये चित्र जादू टोने व इनसे बचाव को ध्यान में रखते हुए बनाए जाते हैं।
- चित्रावण - चितेर जाति के लोगों द्वारा मन्दिर व घर की दीवारों पर यह बनाया जाता है। मुख्य रूप से विवाह समारोह के चित्र।
- दिवासा - मालवा क्षेत्र की प्रसिद्ध भित्ति चित्रकला जो किशोरियों द्वारा श्राद्ध पक्ष में चित्रित की जाती है।
- आठे कन्हैया - कृष्ण जन्माष्टमी को मिट्टी की दीवारों पर रंगों से आठे कन्हैया के चित्र उत्कीर्ण किए जाते हैं।
- हरतालिका चित्र - हरतालिका के दिन भगवान शिव-पार्वती की चित्रात्मक पूजा।
- संजा - किशोरियां श्राद्ध पक्ष में घर की दीवारों पर गोबर, चमकीली पन्नी व फूलों से 16 दिनों तक अलग-अलग पारम्परिक आकृतियाँ बनाती हैं।
निमाड़ चित्रकला
इसमें सामान्यतः चित्रों को भूमि, दीवारों एवं बर्तनों पर उत्कीर्ण किया जाता है।
प्रमुख उदाहरण
- थापा - निमाड़ की प्रसिद्ध चित्रकला, इसमें दशहरा व सैली सप्तमी के अवसर पर हाथ के थापे लगाए जाते हैं (गेरू, गोबर, हल्दी से बने)।
- ईरत - विवाह के अवसर पर कुलदेवी का भित्तिचित्र व उनकी पूजा।
- मोरधन - दीपावली के अवसर पर बनाई जाने वाली चित्रकला।
- पगल्या - प्रथम शिशु के जन्म पर शुभ सन्देश का रेखांकन।
- कंचाली भरना - विवाह के अवसर पर दूल्हा-दुल्हन के मस्तक पर कंचाली भरी जाती है।
- संजाफूल - अश्विनी मास में ये चित्र अविवाहित कन्या द्वारा बनाया जाता है।
- पिरोती - निमाड़ क्षेत्र में हरियाली अमावस्या को यह भित्ति चित्र।
- अन्य - नवरत (नवरात्रि), दशहरा चित्रण, नागचित्र, भाई दूज आदि।
बुन्देलखण्ड चित्रकला
बुन्देली लोक चित्रकला की प्रमुख विशेषता इनकी रंग रेखाएं हैं।
प्रमुख उदाहरण
- सुरैती - लोक चित्रकला का सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रतीकात्मक चित्र दीपावली के अवसर पर लक्ष्मी गणेश पूजन के समय यह चित्रित।
- नौरता/नवरत - नवरात्रि के अवसर पर बनाया जाने वाला भित्तिचित्र इसमें कन्याएँ भी नृत्य करती हैं।
- गोदन गोवर्धन - गोवर्धन पूजा के अवसर पर गोबर से चित्रित।
- चौक - मांगलिक अवसर पर चावल, गेहूँ, ज्वार आटे से बनाया जाता है।
- दौज पुतलिया - भाई दूज पर गोबर से।
बघेलखण्ड चित्रकला
मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश राज्य से प्रभावित।
भूमि व दीवारों पर चित्रांकन, दीवारों को खुरचकर भी चित्र।
प्रमुख उदाहरण
- कोहबर - विवाह के शुभ अवसर पर, इस चित्र का पूजन नवयुगल करते हैं।
- मोरमुरैला - दीवारों पर मोर के भित्तिचित्र।
- नेउरान नमे - भाद्रपद नवमी को चित्रण कर नेवले द्वारा शिशु की रक्षा हेतु बलिदान की कथा प्रस्तुत करता है।
- तिलंगा - कोयले एवं तिली के तेल से दीवारों पर तिलंगा चित्र।
- छठी चित्र - शिशु जन्म के छठे दिन छठी माता की पूजन के लिए चित्र।
मध्य प्रदेश में चित्रकला शैलियाँ
- प्रागैतिहासिक शैली - इस शैली में भीमबेटका, मारा गुफा, आदमगढ़ एवं आदिम चित्रकला सम्मिलित है।
- ग्वालियर शैली - इसका प्रचार प्रसार तोमर शासकों के संरक्षण में हुआ।
- मालवा शैली - बाघ की गुफा में गुप्तकालीन चित्रकला एवं लोक चित्रकला माण्डना आदि प्रसिद्ध हैं।
- बुन्देली शैली - दतिया के राजा शत्रुजीत सिंह ने बुन्देली शैली के प्रचार प्रसार में विशेष भूमिका निभाई तथा यहाँ राजस्थानी शैली स्थापित की।
मध्य प्रदेश राज्य में आदिवासी/जनजातीय चित्रकला
बैगा चित्रकला
- बैगा जनजाति की विशेष चित्रकारी
- मुख्यतः देवी-देवता, पशु-पक्षी, पहाड़, नदी व पौधों का चित्रांकन
- रंगों की सहायता से दीवारों पर उकेरित चित्र
गोण्ड चित्रकला
- गोण्ड जनजाति द्वारा घर की दीवार व आंगन में विशेष चित्रकारी (छिंदवाड़ा, मण्डला एवं नर्मदा के किनारे बसे गोण्ड)
- गोण्ड जनजाति में नोहडोरा चित्रकला प्रचलित है।
पिथौरा भित्ति चित्र
- झाबुआ की भित्ति चित्रकारी। विशेषतः घोड़ों का चित्रांकन।
- भील जनजाति में प्रचलित।
- पेमा फत्या प्रसिद्ध चित्रकार।
मंदाना चित्रकला
- सहरिया जनजाति में प्रचलित।
- संकेतों और मिथकों के कारण इसके सांस्कृतिक महत्व में वृद्धि।
भील चित्रकला
- मध्य प्रदेश की प्रमुख जनजातीय कला।
- प्राकृतिक रंगों का उपयोग।
- चटकीले रंगों के कारण भील चित्रकला को अधिक प्रभावी बनाया गया है।
मध्य प्रदेश के प्रमुख आदिवासी चित्रकार
जनगणसिंह श्याम
- गोण्ड जनजाति के प्रथम प्रसिद्ध कलाकार।
- पारम्परिक चित्रकारी को कागज व कैनवास पर उत्कीर्ण किया है।
- मध्य प्रदेश विधान सभा भवन पर उत्कीर्ण चित्रकारी का श्रेय इन्हीं को।
नर्मदा गोण्ड
- मण्डला जिले से। पशु पक्षियों का चित्रण प्रमुख।
सुमेर सिंह गोण्डी
- हिन्दू देवी देवताओं, चन्द्रमा, सूर्य आदि के चित्र इनकी विशेषता।

Comments
Comment करें