राज्य में जनजातियों से सम्बन्धित प्रमुख संस्थान

राज्य में जनजातियों से सम्बन्धित प्रमुख संस्थान

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जनजातियों से संबंधित प्रमुख संस्थान

मध्य प्रदेश में जनजातियों से संबंधित कई महत्वपूर्ण संस्थान है जो निम्नलिखित हैं।

आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्था

  • स्थापना - 1954 में छिंदवाड़ा में, 1965 में मुख्यालय - भोपाल श्यामला हिल्स में स्थानांतरित किया गया इसके दायित्व निम्नलिखित हैं।
  • अनुसूचित जाति से संबंधित सर्वेक्षण अनुसंधान तथा बिकास कार्यक्रमों का मूल्यांकन एवं अध्ययन।
  • अनुसूचित जनजाति के रीति-रिवाज, बोली एवं रहन-सहन व संस्कृति संबंधी अध्ययन व दस्तावेजी करण।
  • लघु संग्रहालय का संचालन, राज्य स्तरीय बादल भोई संग्रहालय का भी संचालन।
  • आदिवासी क्षेत्रों में पदस्थ विभिन्न बिकास विभागों के द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों व कार्यपालिका कर्मचारी हेतु पुनरअध्ययन प्रशिक्षण।
  • जनजातीय लेखों पर आधारित बुलेटिन का अर्धवार्षिक प्रकाशन।

मध्य प्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम

इसकी स्थापना इण्डियन कम्पनी एक्ट 1956 की धारा 25 के अन्तर्गत (लाभ के लिए नहीं) की गई। 1994 में पंजीकरण के पश्चात 1995 से आर्थिक एवं स्वरोजगार योजनाओं का क्रियान्वयन शुरू हुआ। निगम की अधिकृत अंशपूँजी 50 करोड़ है जिसमें राज्य का हिस्सा 51% तथा केन्द्र का हिस्सा 49% है।

इसके प्रमुख उद्देश्य निम्न है-
  • जनजातीय समाज का आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक बिकास करना।
  • शोषण समाप्त करके उन्हें गरीबी रेखा के ऊपर उठाना।
  • उपरोक्त उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिए ऋण उपलब्ध कराना व ब्याज सहित क्सूल करना।
  • जनजातीय वर्ग के युवाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए स्वरोजगार हेतु आदिवासी वित्त विकास निगम द्वारा बैंकों से ऋण दिलाकर स्वावलम्बी बनाना।

मध्य प्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद

स्थापना
1981 में, जनजाति वर्ग के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए तकनीकी व व्यावसायिक क्षेत्रों में कुशलता का विकास कर रोजगार/स्वरोजगार में वृद्धि करने हेतु।

उद्‌देश्य
  • कुशल एवं अर्द्धकुशल मजदूरों का प्रशिक्षण।
  • सभी स्तर की तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था जिसमें कुशल मजदूर, तकनीशियन आदि भी सम्मिलित हो।
  • तकनीकी कौशल के बिकास के लिए व्यापक आयोजन व आवाश्यक क्रियान्वयन।
  • शासकीय विभागों व शासन के अधीनस्थ संस्थाओं में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों का प्रशिक्षण।
  • स्थानीय संस्थाओं में तकनीकी प्रशिक्षण का प्रबन्ध करना।
  • मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 17 जनवरी 2024 को राज्य में विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 23 जिलों में नए आगनवाड़ी केन्द्र, छात्रावास, वहुउद्देशीय केन्द्रों, सड़कों तथा आवासों को स्वीकृति दी है।

उद्यमी बिकास संस्थान मध्य प्रदेश

स्थापना - 20 मार्च 1980 को आदिम जाति, अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण के उपक्रम के रूप में हुई थी।

प्रमुख उद्देश्य
  • अनुसूचित जाति व जनजाति तथा आर्थिक रूप से पिछड़े व्यक्तियों को उद्योग, व्यापार, तकनीकि में सहायता, प्रशिक्षण, उत्पादन तथा उसके विपणन में सहयोग करना।
  • उद्यमी विकास केन्द्रो (उत्पादन सह प्रशिक्षण केन्द्रों) की स्थापना करना।
  • गतिविधियों का संचालन, मार्गदर्शन व नियंत्रण करना।
  • संस्थाओं व उद्यमी वर्ग की इकाईयों को उद्यम स्थापित करने में सहयोग करना।
  • संस्थान द्वारा सम्बद्ध उद्यमियों के लिए एजेण्ट के रूप में कार्य करना।

मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग

  • गठन - 1995-96 में
  • संरचना - अध्यक्ष के अतिरिक्त दो अशासकीय सदस्य तथा आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग इस आयोग के पदेन सदस्य होते हैं।
  • आयोग के प्रशासनिक व वित्तीय कार्य हेतु सचिव पद की व्यवस्था।

आयोग के कृत्य एवं शक्तियाँ
  • मध्य प्रदेश अधिनियम 1995 क्रमांक 24 की धारा 9 (1) के अनुसार आयोग के निम्न कृत्य हैं-
  • अनुसूचित जनजातियों को संविधान के अधीन दिए गए संरक्षण के लिए आयोग हित प्रहरी का कार्य करे।
  • आदेश 1950 में सम्मिलित करने के लिए कदम उठाने हेतु राज्य सरकार को सिफारिश करना।
  • अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए बने कार्यक्रमों में समुचित सुझाव देना व निगरानी करना।
  • लोक सेवाओं तथा शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए आरक्षण के सम्बन्ध में सलाह दे व राज्य सरकार के कानूनों का पालन करें।
  • आयोग की सलाह साधारणतः राज्य सरकार पर आबद्धकारी होगी तथापि जहाँ सरकार स्वीकार नहीं करती वहाँ कारण अभिलिखित करेगी।

निम्नलिखित विषयों के बावत किसी बाद का विचारण करने वाले किसी सिविल न्यायालय की शक्तियाँ होगीं अर्थात-
  • राज्य के किसी भी भाग से किसी भी व्यक्ति को समन व हाजिर करना।
  • शपथ पर उसकी परीक्षा करना।
  • दस्वारेज को प्रकट करने व पेश करने की अपेक्षा करना।
  • शपथ पन्नो पर साक्ष्य ग्रहण करना।
  • साक्षी और दस्तावेजो की परीक्षा के लिए समन निकालना।

मध्य प्रदेश आदिमजाति मंत्रणा परिषद

  • संविधान के अनुच्छेद - 244 (1) के अन्तर्गत प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्र के प्रशासन व नियंत्रण तथा अनुसूचित जनजातियों के हित संरक्षण के सुझाव हेतु।
  • मध्य प्रदेश आदिम जाति मंत्रणा परिषद की नियमावली 1957 लागू की गई है।

मध्य प्रदेश आवासीय कल्याण आवासीय व आश्रम शिक्षण संस्थान

  • भोपाल में स्थित इस संस्था का अध्यक्ष जनजातीय कार्य विभाग मंत्री (पदेन) होता है।
  • उपाध्यक्ष - जनजातीय कार्य विभाग का प्रमुख सचिव तथा जनजातीय कार्य विभाग मध्य प्रदेश का आयुक्त इसका सचिव होता है।
  • प्रति 3 माह पर इस सोसाइटी के संचालक मण्डल की बैठक होती है।
  • इसको अनुदान भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय से प्राप्त होता है।
  • इसके द्वारा मध्य प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में 29 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश आदिवासी लोक कला परिषद भोपाल

  • गठन - 1980 में, भोपाल में स्थित
  • राज्य के जनजातीय और लोक सस्कृति विषयक सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण प्रकाशन और समारोह का आयोजन करती है।
  • इसके द्वारा तुलसी समारोह, जनजातीय चित्र प्रदर्शनी एवं शिविर (खजुराहो) निमाड़ उत्सव, राष्ट्रीय शिल्प मेला (भोपाल) लोकरंग समारोह (भोपाल) आदि का आयोजन किया जाता है।
  • चौमासा नामक पत्रिका का सम्पादन इसी परिषद द्वारा।

मध्य प्रदेश आदिवासी एवं हरिजन कल्याण विभाग

वर्ष 1964 में स्थापित आदिम जनजाति कल्याण विभाग का नाम बदलकर 1965 में आदिम एवं हरिजन कल्याण विभाग कर दिया।

मुख्य कार्य
राज्य के आदिवासी एवं हरिजन समाज के कल्याण के लिए काम करना।

आदिवासी प्रकोष्ठ

  • स्थापना - 9 जनवरी 1984 को उच्च न्यायालय की अनुशंसा पर।
  • गठन के समय मुख्यमंत्री - अर्जुन सिंह
  • प्रथम बैठक - 17 अगस्त 1984
  • अध्यक्ष - मुख्यमंत्री
  • उपाध्यक्ष - राज्य का विधि व जनजातीय मंत्री
  • इस प्रकोष्ठ में 5 सलाहकार, 8 सदस्य, 1 सदस्य सचिव तथा एक सहायक सचिव होता है।

विशेष पिछड़ी जनजाति समूह प्राधिकरण

  • प्रदेश में 3 जनजातियाँ बैगा, भारिया और सहरिया को विशेष पिछड़ी जनजाति माना जाता है।
  • इनके लिए राज्य स्तर पर विशेष प्राधिकरण का गठन किया गया।
  • इसमें इन्ही जातियों का अध्यक्ष व 3 अशासकीय सदस्य का मनोनयन।
  • प्रदेश में पिछड़ी जनजाति के विकास के क्रियान्वयन हेतु 11 अभिकरणों का गठन 15 जिलों में किया गया है।

अभिकरण मुख्यालय व उनके कार्यक्षेत्र

सहरिया बिकास अभिकरण
मुख्यालय कार्यक्षेत्र
ग्वालियर ग्वालियर एवं दतिया
गुना गुना और अशोक - नगर
शिवपुरी शिवपुरी
श्योपुरकलां मुरैना, भिण्ड , शिवपुर कला

बैंगा बिकास अभिकरण
मुख्यालय कार्यक्षेत्र
मंडला मंडला
बालाघाट बालाघाट
डिण्डौरी डिण्डौरी
अनूपपुर अनूपपुर
शहडोल शहडोल

भारिया बिकास अभिकरण
मुख्यालय कार्यक्षेत्र
तामिया छिंदवाड़ा के पातालकोट क्षेत्र के 122 गांव सम्मिलित

मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय कोल जनजाति विकास प्राधिकरण

  • गठन - 6 मई 2011 को आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग मंत्रालय द्वारा।
  • इनकी संरचना में 1 अध्यक्ष सहित 5 अशासकीय सदस्य व 11 शासकीय सदस्य (कोल जनजाति से सम्वन्धित व्यक्ति)

इन्दिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय

  • इसकी स्थापना विश्वविद्यालय अधिनियम 2007 के तहत वर्ष 2008 में की गई।
  • मुख्यालय - अमरकंटक (मध्य प्रदेश)।
  • यह भारत का पहला जनजातीय विश्वविद्यालय है।

आवासीय विद्यालय

  • जबलपुर, गुना व इंदौर में तीन आवासीय विद्यालय संचालित है।
  • मुख्य उद्देश्य : पिछड़ी जनजाति समूह के विद्यार्थियों के लिए विशिष्ट शिक्षा की व्यवस्था करना है।
  • इनमें निःशुल्क आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएँ उपलब्ध होती है।
  • प्रत्येक विद्यालय में 600 सीटें (300 लड़के व 300 लड़कियों के लिए)

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय

  • इन विद्यालयों का गठन फर्म एण्ड सोसायटी एक्ट के तहत किया गया है।
  • मध्य प्रदेश में वर्तमान में 33 एकलव्य आदर्श विद्यालय संचालित है।
  • इसमें 29 अनुसूचित जाति एवं 4 विशेष रूप से कमजोर समूह हेतु  (इंदौर, गुना, जबलपुर व करहल में) संचालित है।

मध्य प्रदेश में विशिष्ट क्रीडा परिसर   

क्रीड़ा / खेल परिसर संबंधित खेल
बालक क्रीड़ा परिसर, इन्दौर एथलेटिक्स, स्वीमिंग, डायविंग
कन्या क्रीड़ा परिसर, झाबुआ तीरंदाजी
वालक क्रीड़ा परिसर, शहडोल क्लाइम्बिंग, बोल्डरिंग
कन्या क्रीड़ा परिसर, धार टेबल टेनिस, बैडमिण्टन
कन्या क्रीड़ा परिसर, जबलपुर साइकिलिंग
वालक क्रीड़ा परिसर, खरगौन जिम्नास्टिक
बालक क्रीड़ा परिसर, श्योपुर एथलेटिक्स

शैक्षणिक एवं आवासीय संस्थाएँ

  • आदिवासियों में शिक्षा के प्रसार के लिए कनिष्ठ प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक स्तर तक स्कूलों का संचालन।
  • आदिवासी बच्चों को आवासीय सुविधा तथा पढ़ाई की अनुकूल वातावरण सुलभ कराने लिए छात्रावास/आश्रम संचालित है।
  • जिन विद्यार्थियों को छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता उनको निःशुल्क आवास के लिए छात्रवृति (छात्र गृह योजना) दी जाती है।
  • जिन आदिवासी गावों की जनसंख्या 250 अधिक है वहाँ कनिष्ठ प्राथमिक स्कूल खोने जा रहे हैं।
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को MPPSC, MPESB (Vyapam), MP Police, Patwari, Forest Guard और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।