राज्य में लोक संस्कृति
मध्य प्रदेश सांस्कृतिक दृष्टिकोण से एक अति समृद्ध राज्य माना जाता है इसके विभिन्न क्षेत्रों में लोकनृत्य, लोकनाट्य व लोकगीत प्रचलित हैं।
जनजातीय संकेन्द्रण, संयोजन तथा वितरण के आधार पर संयुक्त मध्य प्रदेश (मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़) को चार जनजातीय सांस्कृतिक प्रदेशों में बांटा गया था।
- पूर्वी जनजातीय सांस्कृतिक प्रदेश
- मध्य जनजातीय सांस्कृतिक प्रदेश
- पश्चिमी जनजातीय सांस्कृतिक प्रदेश
- दक्षिणी जनजातीय सांस्कृतिक प्रदेश
राज्य पुनर्गठन के पश्चात मध्य प्रदेश को दो सांस्कृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है।
- मध्य जनजातीय सांस्कृतिक प्रदेश
- पश्चिमी जनजातीय सांस्कृतिक प्रदेश
मध्य जनजातीय सांस्कृतिक प्रदेश
- मण्डला, बालाघाट, सिवनी, बैतूल, छिंदवाड़ा आदि।
- मैकाल व सतपुड़ा पर्वत से आच्छादित, इसी क्षेत्र में नर्मदा घाटी भी।
- गोण्ड, बैगा, कोल, कोरकू, परधान, भारिया।
पश्चिमी जनजातीय सांस्कृतिक प्रदेश
- धार, झाबुआ, खरगौन तथा रतलाम
- मालवा पठार का भाग (बेसाल्ट चट्टान से निर्मित) व दक्कन के पठार का हिस्सा
- भील, भिलाला, बारेल, पाटिल्या इत्यादि।

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