ऋग्वैदिक काल (1500-1000 ई. पू.)

ऋग्वैदिक काल (1500-1000 ई. पू.)

  • यह मुख्यतः ग्रामीण सभ्यता थी, मुख्य व्यवसाय- पशुपालन व गौण व्यवसाय कृषि था।
  • भारत में आर्यों की जानकारी ऋग्वेद से मिलती है जो हिंद-यूरोपीय भाषाओं का सबसे पुराना ग्रन्थ है।
rigvedic-kal

वैदिक साहित्य

वेद: ऋग्वेद
  • उपवेद: आयुर्वेद (औषधि)
  • ब्राह्मण: ऐतरेय, कौषीतकी
  • उपनिषद: ऐतरेय, कौषीतकी
  • अरण्यक: ऐतरेय, कौषीतकी
  • मंत्र: 10,552 (सूक्त: 1028)

वेद: सामवेद
  • उपवेद: गंधर्ववेद (संगीत)
  • ब्राह्मण: पंचविश, जैमिनीय
  • उपनिषद: केन, छान्दोग्य
  • अरण्यक: छान्दोग्य, जैमिनीय
  • मंत्र: 1810

वेद: यजुर्वेद
  • उपवेद: धनुर्वेद (युद्ध)
  • ब्राह्मण: तैत्तिरीय, शतपथ
  • उपनिषद: तैत्तिरीय, वृहदारण्यक, ईश, कठ
  • अरण्यक: तैत्तिरीय, वृहदारण्यक
  • मंत्र: 1975 (शुक्ल यजुर्वेद में)

वेद: अथर्ववेद
  • उपवेद: शिल्प वेद (वास्तु कला)
  • ब्राह्मण: गोपथ
  • उपनिषद: मुण्डक, माण्डूक्य, प्रश्न
  • अरण्यक: -
  • मंत्र: लगभग 6000 (सूक्त: 730)

भौगोलिक विस्तार

  • ऋग्वेद में उल्लिखित सात नदियों (सिन्धु, सरस्वती, सतलुज, व्यास, रावी, झेलम व चिनाब) के आधार पर आर्यों के निवास को सप्त सैन्धव प्रदेश कहा गया है।
  • भारत में आर्य सर्वप्रथम पंजाब व अफगानिस्तान क्षेत्र में बसे थे।
  • सतलज नदी से लेकर यमुना नदी तक के क्षेत्र को ब्रह्मावर्त के नाम से जाने गए।
ऋग्वैदिक काल की नदियाँ
प्राचीन नाम आधुनिक नाम
वितस्ता झेलम
अस्किनी चिनाब
परुष्णी रावी
शतुद्रि सतलुज
विपाशा व्यास
सरस्वती (सर्वश्रेष्ठ नदी) घग्घर
कुभा काबुल
गोमती गोमल
सिन्धु सिन्ध
दृषद्वती घग्घर

सामाजिक स्थिति

  • समाज के संगठन का आधार गोत्र या जन्म मूलक था।
  • पितृसत्तात्मक समाज व संयुक्त परिवार प्रथा।
  • नाना, दादी, नाती, पोते सभी के लिए नप्तृ शब्द का प्रयोग।

शिक्षा
  • गुरुकुल पद्धति जिसमें मौखिक शिक्षा दी जाती थी। शिक्षा की चर्चा ऋग्वेद के सातवें मण्डल में है।

विवाह
  • अनुलोम विवाह (उच्च वर्ण पुरुष, निम्न वर्ण स्त्री)
  • प्रतिलोम विवाह (उच्च वर्ण स्त्री, निम्न वर्ण पुरुष)

स्त्रियों की दशा
  • समाज में बहुत अच्छी दशा।
  • कन्याओं का उपनयन संस्कार।
  • पुनर्विवाह (विधवा विवाह) व नियोग प्रथा (देवर के साथ साहचर्य)।
  • अपाला, घोषा, लोपा मुद्रा ने स्त्रियों के लिए ऋग्वेद की विभिन्न ऋचाओं की रचना की।

राजनीतिक स्थिति

कबीलाई व्यवस्था वाला शासन, कबीले के राजा को गोप्ता कहते थे। ग्राम का प्रधान ग्रामणी। 

प्रशासनिक ईकाई

  • कुल
  • ग्राम
  • विश
  • जन
  • राष्ट्र

ऋग्वेद में सभा की चर्चा 8 बार समिति की चर्चा 9 बार तथा विदथ की चर्चा 122 बार हुई है।
  • सभा - कुलीनों की सभा
  • समिति - साधारण लोग की सभा
  • विदथ - जनजाति की सभा
  • गण - एक कबीला संगठन

ऋग्वैदिक काल में कृषि

  • ऋग्वेद के चतुर्थ मंडल में कृषि प्रक्रिया का विवरण मिलता है।
  • यव (जौ) का उल्लेख, पांच ऋतुओं का ज्ञान, सम्पति की गणना गायों से।

धार्मिक स्थिति

  • बहुदेववादी होते हुए भी एकेश्वरवाद में विश्वास।
  • प्रकृति पूजा व यज्ञ का विशेष स्थान।
  • ऋग्वेद में इन्द्र का वर्णन सर्वाधिक प्रतापी व लोकप्रिय देवता के रूप में।
ऋग्वैदिक देवियाँ
देवी कार्य
सूर्या सूर्य की पुत्री
इला अराधना की देवी
पृथ्वी जगत की माता
उषा अरुणोदय की देवी
अदिति देवों की महान देवी
पुरन्धि उर्वरता की देवी
अरण्यानी वन देवी
रात्रि रात की देवी
दिशान वनस्पति की देवी
ऋग्वैदिक काल के प्रमुख शब्द
अघन्या गाय
गोप्ता राजा
गोमत धनी व्यक्ति
गविष्ठ युद्ध
सीता हल से बनी सिरा
पुरन्धि उर्वरता की देवी
सिन्धु नदी देवी
आपा जल की देवी
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को MPPSC, MPESB (Vyapam), MP Police, Patwari, Forest Guard और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।