तीर्थंकर
जैन धर्म में तीर्थंकर को 'जिन' या सभी प्रवृत्तियों का विजेता कहा गया है। जिन का अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है जिसे अंनत ज्ञान की प्राप्ति हो चुकी है जो दूसरों को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बतलाता है।
तीर्थंकर कोई दैवीय अवतार नहीं बल्कि एक सामान्य मनुष्य के रूप में जन्म लेती है तथा कठिन तपस्या व ध्यान से तीर्थंकर की स्थिति प्राप्त करती है।
तीर्थंकर को भगवान का अवतार न मानकर आत्मा की उच्चतम शुद्ध विकसित अवस्था के रूप में परिभाषित किया गया है।
तीर्थंकरों की विशेषताएँ
- अपने ज्ञान के द्वारा दूसरों को शिक्षा व अच्छा मार्ग प्रशस्त करना
- अपने उपदेश से जन कल्याण व मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताना
- जन्म-मृत्यु के बंधन से खुद मुक्त होना व सभी की इसमें मदद करना
- वर्तमान समय अवसर्पिणी का है (लौटने वाले आनंद का चक्र) जिसके पहले तीर्थंकर ऋषभदेव हुए।
जैन धर्म के 24 तीर्थंकर
1. श्री आदिनाथ जी
- चिह्न: बैल
- जन्म नगरी: अयोध्या
- माता: मरुदेवी
- पिता: नाभिरज
- निर्वाण भूमि: अष्टपद
2. श्री अजितनाथ जी
- चिह्न: हाथी
- जन्म नगरी: अयोध्या
- माता: विजय सेना
- पिता: जितशत्रु
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
3. श्री सम्भवनाथ जी
- चिह्न: घोड़ा
- जन्म नगरी: श्रावस्ती
- माता: सुषेणा
- पिता: दृढ़राज
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
4. श्री अभिनन्दननाथ जी
- चिह्न: बन्दर
- जन्म नगरी: अयोध्या
- माता: सिद्धार्था
- पिता: स्वयंवर
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
5. श्री सुमतिनाथ जी
- चिह्न: चकवा
- जन्म नगरी: अयोध्या
- माता: सुमंगला
- पिता: मेघराज
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
6. श्री पद्मप्रभु जी जी
- चिह्न: लाल कमल
- जन्म नगरी: कोशाम्बी
- माता: सुसीमा
- पिता: धरणराज
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
7. श्री सुपार्श्वनाथ जी
- चिह्न: साथिया
- जन्म नगरी: बनारस
- माता: पृथ्वीषेणा
- पिता: सुप्रतिष्ठ
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
8. श्री चन्द्रप्रभु जी
- चिह्न: चन्द्रमा
- जन्म नगरी: चन्द्रपुरी
- माता: लक्ष्मणा
- पिता: महासेन
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
9. श्री पुष्पदन्त जी
- चिह्न: मगर
- जन्म नगरी: कान्दी
- माता: जयरामा
- पिता: सुग्रीव
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
10. श्री शीतलनाथ जी
- चिह्न: श्री वृक्ष
- जन्म नगरी: भद्दिदलपुर
- माता: सुनन्दा
- पिता: दृढ़रथ
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
11. श्री श्रेयांसनाथ जी
- चिह्न: गैण्डा
- जन्म नगरी: सिंहपुरी
- माता: विपुलानन्दा
- पिता: विष्णुराज
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
12. श्री वासुपूज्य जी
- चिह्न: भैंसा
- जन्म नगरी: चम्पापुरी
- माता: जयावती
- पिता: वासुपूज्य
- निर्वाण भूमि: चम्पापुरजी
13. श्री विमलनाथ जी
- चिह्न: शूकर
- जन्म नगरी: कम्पिला
- माता: जयश्यामा
- पिता: कृतिवर्य
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
14. श्री अनन्तनाथ जी
- चिह्न: सेही
- जन्म नगरी: अयोध्या
- माता: लक्ष्मीमती
- पिता: सिंहसेन
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
15. श्री धर्मनाथ जी
- चिह्न: वज्र
- जन्म नगरी: रतनपुर
- माता: सुप्रभा
- पिता: भानुराज
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
16. श्री शान्तिनाथ जी
- चिह्न: मृग
- जन्म नगरी: हस्तिनापुर
- माता: ऐरादेवी
- पिता: विश्वसेन
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
17. श्री कुन्थुनाथ जी
- चिह्न: बकरा
- जन्म नगरी: हस्तिनापुर
- माता: रीकान्ता
- पिता: सूरसेन
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
18. श्री अरहनाथ जी
- चिह्न: मीन
- जन्म नगरी: हस्तिनापुर
- माता: मित्रसेना
- पिता: सुदर्शन
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
19. श्री मल्लिनाथ जी
- चिह्न: कलश
- जन्म नगरी: मिथिला
- माता: प्रजावती
- पिता: कुम्भराज
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
20. श्री मुनिसुव्रतनाथ जी
- चिह्न: कछवा
- जन्म नगरी: राजगृही
- माता: सीमा
- पिता: सुमित्र
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
21. श्री नमिनाथ जी
- चिह्न: नीलकमल
- जन्म नगरी: मिथिला
- माता: वर्मिला
- पिता: विजय
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
22. श्री नेमिनाथ जी
- चिह्न: शंख
- जन्म नगरी: शौरीपुर
- माता: शिवादेवी
- पिता: समुद्र विजय
- निर्वाण भूमि: गिरिनार पर्वत
23. श्री पार्श्वनाथ जी
- चिह्न: सर्प
- जन्म नगरी: बनारस
- माता: वामादेवी
- पिता: अश्वसेन
- निर्वाण भूमि: श्री सम्मेद शिखर जी
24. श्री महावीर जी
- चिह्न: सिंह
- जन्म नगरी: कुण्डलपुर
- माता: त्रिशाला
- पिता: सिद्धार्थ
- निर्वाण भूमि: पावापुर
महत्वपूर्ण तीर्थंकर
ऋषभदेव
- जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर
- ऐसा माना जाता है इनके पुत्र भरत के नाम से ही भारत देश का नाम पड़ा
- वायुपुराण, विष्णुपुराण व भागवत पुराण में इनका उल्लेख
मल्लिनाथ
- 19 वीं तीर्थंकर बनी
- श्वेताम्बर मान्यता के अनुसार मल्ली स्त्री है यह उस सिद्धांत की एकमात्र अपवाद थी जिसके अनुसार पुरुष ही जिन बन सकता है।
- दिगम्बर मान्यतानुसार मल्ली नाम के एक पुरुष थे।
पार्श्वनाथ
- पिता - अश्वसेन (काशी के राजा)
- 23 वें तीर्थंकर
- 30 वर्ष की आयु में गृहत्याग, 83 दिन की घोर तपस्या के बाद सम्मेत पर्वत पर ज्ञान प्राप्ति
- इनके समय चातुर्याम शिक्षा या चार आचरण पालन करने को कहा गया - (1) सत्य (2) अहिंसा (3) अस्तेय (4) अपरिग्रह
महावीर स्वामी
- 24वें तीर्थंकर - महावीर स्वामी
- जन्म वर्ष - 599 ईसा पूर्व (कुछ स्रोत में 540 ई.पू.)
- जन्म स्थान - कुण्डग्राम (वैशाली के निकट)
- माता - त्रिशला
- पिता - सिद्धार्थ (ज्ञात्क क्षत्रियों के संघ प्रधान)
- बचपन का नाम - वर्धमान
- पत्नी - यशोदा
- पुत्री - अनोज्जा (प्रियदर्शना)
- पुत्री का विवाह - जमालि के साथ
- संन्यास - 30 वर्ष की आयु में
- तपस्या की अवधि - 12 वर्ष
- ज्ञान प्राप्ति स्थल - जृम्भिकग्राम
- ज्ञान प्राप्ति का स्थान - ऋजुपालिका नदी तट, साल वृक्ष के नीचे
- उपदेश की भाषा - प्राकृत (अर्धमागधी)
- ज्ञानी उपाधियाँ - कैवलिन, अर्हत, जिन, निर्युक्त, निर्ग्रन्थ
- प्रथम गणधर - गौतम स्वामी
- संघ की स्थापना स्थल - राजगृह
- विद्रोह करने वाला - जमालि
- विद्रोह का कारण - क्रियावानुकूल सिद्धांत
- 'महाव्रत - अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य (पांचवां 'हाव्रत ब्रह्मचर्य जोड़ा)
- मृत्यु की आयु - 72 वर्ष
- मृत्यु वर्ष - 527 ईसा पूर्व, पावापुरी ('मल्लराजा सुस्तिपाल के राजप्रासाद में)
- निर्वाण स्थल - पावापुरी
- महावीर स्वामी की मृत्यु के बाद जैन संघ का प्रथम अध्यक्ष - सुधमर्ण

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