भारतवर्ष
यह लेख MPPSC के अभ्यर्थियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है, जो 'भारत की संकल्पना' और इसके ऐतिहासिक-भौगोलिक आधार को समझने में सहायक है। इसमें भारतवर्ष के नामकरण, पौराणिक भूगोल (जम्बूद्वीप), सात द्वीपों के विवरण और मेरू पर्वत की स्थिति पर प्रकाश डाला गया है। यह प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पारंपरिक और पौराणिक हिन्दू साहित्य में भारत को भरतखण्ड कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि भारतवर्ष जम्बूद्वीप नामक एक वृहद् भौगोलिक इकाई का भाग था। जम्बूद्वीप मेरू पर्वत के चारों ओर स्थिति सात संकेन्द्रीय पौराणिक द्वीपों में से एक माना जाता है।
भौगोलिक पृष्ठभूमि
हिमालय पर्वत के दक्षिण तथा हिन्द महासागर के उत्तर में स्थित एशिया महाद्वीप का विशाल प्रायद्वीप भारत है। इसका विस्तृत भूखण्ड, जिसे एक उपमहाद्वीप कहा जाता है व आकार में विषम चतुर्भुज जैसा है। भौगोलिक दृष्टि से भारत के चार भाग हैं।
(i) उत्तर का पर्वतीय प्रदेश
यह तराई के दलदली वनों से लेकर हिमालय की चोटी तक विस्तृत हैं जिसमें काँगड़ा, टिहरी, कुमायूँ, सिक्किम आदि के प्रदेश सम्मिलित हैं।
(ii) गंगा तथा सिंधु का उत्तरी मैदान
इसके अन्तर्गत सिंधु तथा उसकी सहायक नदियों की घाटियाँ सिंध तथा राजस्थान के रेगिस्तानी भाग तथा गंगा व यमुना द्वारा सिंचित प्रदेश हैं। इसे 'आर्यावर्त' कहा गया है।
(iii) दक्षिण का पठार
उत्तर में नर्मदा तथा दक्षिण में कृष्णा और तुंगभद्रा के बीच का भू-भाग।
(iv) सुदूर दक्षिण के मैदान
इसमें दक्षिण के लम्बे एवं संकीर्ण समुद्री क्षेत्र सम्मिलित हैं।
गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी नदियों के उपजाऊ डेल्टा प्रदेश।
- दक्षिण का पठार तथा सुदूर दक्षिण के मैदानी प्रदेश मिलकर आधुनिक दक्षिण भारत (प्रायद्वीपीय भारत) का निर्माण करते हैं।
- नर्मदा और ताप्ती नदियाँ, विन्धय तथा सतपुड़ा पहाड़ियाँ एवं महाकान्तार के वन मिलकर उत्तर भारत को दक्षिण भारत से पृथक करते हैं।
- प्रकृति ने भारत को एक विशिष्ट भौगोलिक इकाई प्रदान की है। उत्तर में हिमालय पर्वत एक ऊँची दीवार के समान इसकी रक्षा करता है तथा हिन्द महासागर इस देश को पूर्व, पश्चिम व दक्षिण से आवृत किए हुए हैं।
भारतवर्ष नाम कैसे पड़ा?
सर्वाधिक स्वीकृत विचार: भारतवर्ष नामक वैदिक आर्यों की भरत जनजाति से लिया गया था। इसी संस्कृति के प्रभाव से सम्पूर्ण राष्ट्र को भारतवर्ष कहा जाने लगा।
वायु पुराण के अनुसार "समुद्र के उत्तर और हिमालय के दक्षिण में स्थित देश को भारत कहा जाता है क्योंकि वहाँ भरत की संतानें निवास करती हैं।"
भारतवर्ष नाम पड़ने से संबंधित अन्य विचार
- वेदव्यास के अनुसार भारतवर्ष नाम दुष्यन्त के पुत्र भरत के नाम से पड़ा।
- मैत्रेय पुराण के अनुसार "मानव जाति के आदिपुरुष मनु द्वारा शासित भूमि का नाम भारतवर्ष था"
- जैनमतानुसार ऋषभदेव के सबसे बड़े पुत्र का नाम भरत था जो एक सदाचारी व्यक्ति और महान तपस्वी थे। उनके नाम पर भारतवर्ष नाम पड़ा
भारतवर्ष की अवधारणा पर शास्त्रीय दृष्टिकोण
भारतवर्ष का शाब्दिक अर्थ है - भा (ज्ञान) + रत (प्रकाश) + वर्ष (महाद्वीप या भू-खण्ड) अर्थात् वह भू-खण्ड जो ज्ञान - प्रकाश को समर्पित है।
भरत जनजाति जिसके नाम पर देश का नाम पड़ा ऋग्वेद में वर्णित एक सम्मानित और प्राचीन जनजाति थी। ऋग्वेद के 7वें मण्डल में दसराज्ञ युद्ध का उल्लेख हुआ है जो भरत जनजाति तथा दस अन्य जनजातियों के गठजोड़ के बीच लड़ा गया। इस युद्ध में भरत जनजाति की विजय हुई।
भारतीय परम्परा के विभिन्न संप्रदायों व ग्रंथों में समय चक्र के तीन अलग-अलग युगों में यथा- सत्ययुग, द्वापर व त्रेता में तीन अलग-अलग भरत नाम के राजा का उल्लेख हुआ है।
- सतयुग में - ऋषि ऋषभदेव के सबसे बड़े पुत्र भरत। ऋषभदेव को आदिनाथ के नाम से भी जाना जाता है।
- त्रेतायुग में - अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र व श्रीराम के छोटे भाई के रूप में
- द्वापर युग में - राजा दुष्यन्त व शकुंतला के पुत्र के रूप में हुआ था। कालिदास ने अपनी रचना अभिज्ञान शाकुंतलम में राजा दुष्यन्त व शकुंतला के प्रेम का वर्णन किया है।
इस प्रकार तीनों भरत अवतारों ने विभिन्न युगों में भारतवर्ष को राजनीतिक एवं सांस्कृतिक एकता में एकीकृत किया।
प्राचीन ग्रंथों में उल्लिखित द्वीप
प्राचीन ग्रंथों में समस्त पृथ्वी को कई खण्डों या द्वीपों में बाँटा गया है। सामान्यतः द्वीपों से तात्पर्य जल से घिरी हुई भूमि से होता है। पुराणों में द्वीपों को ऐसे भू-भाग के रूप में बताया गया है जो जल से घिरे होने के कारण अलग-अलग होता है।
पुराणों में समस्त पृथ्वी को सात खण्डों में विभक्त किया गया है प्रत्येक भू-खण्ड के दोनों ओर कई समुद्र बताए गए हैं। इन सात द्वीपों के नाम निम्न हैं - (i) जम्बू द्वीप (ii) पुष्कर द्वीप (iii) शक द्वीप (iv) शाल्मली द्वीप (v) कुश द्वीप (vi) प्लक्ष द्वीप (vii) क्रौंच द्वीप
जम्बू द्वीप
प्रायः बृहत्तर भारत की धरती को ग्रंथों में इसी नाम से अभिहित किया गया है।
मत्स्य पुराण के अनुसार वृहत भारत के 9 खण्ड थे जो अब समुद्र में डूब चुके हैं। (i) इंद्रद्वीप (ii) कसेरू (iii) ताम्रपर्णी (iv) गमिष्ठमान (v) नागद्वीप (vi) सौम्य (vii) गंधर्व (viii) वरूण (ix) भरत
- जम्बूद्वीप का अधिकांश भाग रशिया माना जाता है।
- विष्णुपुराण के अनुसार जम्बू के वृक्ष पर हाथियों जितने बड़े फल लगते थे उनके फल पक कर चोटियों पर गिरते थे तो उनके रस से एक नदी बन जाती थी।
- रसीले फल जिस नदी में गिरते थे वह मधुवाहिनी जम्बू नदी कहलाती थी। इस जल व फल के सेवन से रोग-शोक तथा वृद्धावस्था आदि का प्रभाव नहीं होता।
- जम्बूद्वीप के मध्य में सुमेरू या मेरू पर्वत स्थित है।
- जम्बूद्वीप पृथ्वी के केन्द्र में स्थित माना गया है।
- जम्बूद्वीप के छह पर्वत- हिमवान, हेमकूट, निषध, नील, श्वेत, श्रृंगवान
मेरू पर्वत
- पूर्व में - सीता नदी (वर्तमान यरकंद नदी से मिलती)
- पश्चिम में - शुभमक्षु (अम्मूदरिया)
मंगोलिया में इसे वक्षु कहते हैं। चीन में इसे पीतसू कहते हैं। तिब्बत में इसे पक्षू कहते हैं।
शुभमक्षु नदी अरब सागर में गिरती है।
- उत्तर में - भाद्र नदी (अरब सागर में गिरती है)
- दक्षिण में - किशन गंगा नदी (गंगाबल व हरिमुख से निकलती है)
जम्बूद्वीप के वर्ष (खण्ड)
कुल नौ खण्ड हैं - इनमें से केवल भारतवर्ष मृत्युलोक व शेष 8 देवलोक हैं।
- (i) इलावृत्त वर्ष - इसके मध्य में सुमेरू या मेरू पर्वत है।
- (ii) भद्रास वर्ष - धर्मराज के पुत्र 'भद्रस्रवा का राज्य', यहाँ भगवान हयग्रीव की पूजा
- (iii) हरिवर्ष - यह भक्तवर प्रह्लाद जी रहते हैं, यहाँ नरसिंह भगवान की पूजा
- (iv) केतुमालवर्ष - लक्ष्मी जी संवत्सर नाम के प्रजापति पुत्र, कन्या व कामदेव की पूजा
- (v) रम्यकवर्ष - इसके अधिपति मनुजी है, यहाँ भगवान मत्स्य की पूजा
- (vi) हिरण्यमय वर्ष - अधिपति अर्यमा, भगवान कच्छप की पूजा
- (vii) उत्तरकुरुवर्ष - यहाँ भगवान वाराह की पूजा
- (viii) किम्पुरुषवर्ष - अधिपति - हनुमान जी, श्रीराम चन्द्र की पूजा
पुष्कर द्वीप
इसकी पहचान रूस के पूर्वी एवं उत्तर पूर्वी भाग यानी साइबेरिया से की जा सकती है। इस नाम न्यग्रोध (वट) वृक्ष के कारण पड़ा माना जाता है कि इस विशाल वृक्ष में ब्रह्मा का निवास है।
पुष्कर द्वीप के स्वामी वीर 'सवन' थे इनके दो पुत्र थे - महाबीर और जातक
यहाँ के दो वर्ष हैं जो इनके पुत्रों के नाम पर हैं-
- (i) महाबीर वर्ष - मानुषोत्तर पर्वत के बाहर की ओर है।
- (ii) जातक वर्ष - मानुषोत्तर पर्वत के भीतरी और है।
इस द्वीप पर कोई नदी नही, चारों ओर से मीठे पानी के सागर से घिरा है।
पुष्कर द्वीप के चार वर्ण हैं - वंग, मागध, मानस और मंगद
यह द्वीप भयावह, अपवित्र, निर्मम व विनाशकारी तथा आत्मा का हनन करने वाला माना जाता है इसे राक्षसों का प्रदेश कहते हैं।
शक द्वीप
इसका विस्तार जम्बूद्वीप के दक्षिण पूर्व में स्थित पट्टी क्षेत्रों में है
इसके भाग - म्यांमार, थाईलैण्ड, वियतनाम, मलेशिया, इण्डोनेशिया व दक्षिण पूर्व एशिया के पूर्वी द्वीप समूह।
उष्ण आर्द्र जलवायु होने से सदाबहार वनों का विस्तार
शाल्मली द्वीप
इसमें मेडागास्कर सहित अफ्रीका का अरब सागर तटीय भाग
शाल्मली पेड़ (मुलायम सिल्क वाला पेड़) के कारण इस द्वीप का नाम शाल्मली द्वीप पड़ा। ये पेड़ विषुवत रेखीय प्रदेश में पाए जाते हैं।
पूरे वर्ष मेघाच्छादन रहता है, पर्याप्त जंगली खाद्य पदार्थ उपलब्ध
कुश द्वीप
विस्तार - ईरान तथा गर्म मरूस्थल के सीमा प्रदेश तक
मेरू पर्वत के दक्षिण पश्चिम का भू-भाग
इस द्वीप में सात मौसमी नदियाँ बहती हैं
इस द्वीप का बड़ा भाग झाड़ियों व लताओं से घिरा
इसमें खनिज व मूल्यवान पदार्थ का भण्डार
प्लक्ष द्वीप
प्लक्ष वृक्ष के नाम पर जो इस क्षेत्र में भूमध्य सागर के चारों ओर विस्तृत है।
भूमध्य सागर के मैदानी भागों का प्रदेश
क्रोंच द्वीप
मेरू पर्वत के उत्तर - पश्चिम में स्थित
उत्तर पश्चिम यूरोप का अधिकांश भाग शामिल
पर्याप्त वर्षा वाला आर्द्र प्रदेश


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