गणतंत्र

गणतंत्र

  • उत्तरवैदिक काल तथा महाजनपद काल में हमें अनेक गणराज्यों की जानकारी मिलती है।
  • भारत के प्राचीन गणराज्य समकालीन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का प्रारम्भिक रूप माने जाते हैं।
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गणराज्य के प्रकार

कौटिल्य ने अर्थशास्त्र में दो प्रकार के संघ राज्यों का उल्लेख किया है।
  1. वार्ताशस्त्रोपजीवी- ऐसे संघ राज्य जहाँ के लोगो की आजीविका का मुख्य स्रोत वार्ता अर्थात व्यापार, वाणिज्य, कृषि व पशुपालन हो उदाहरण - कम्बोज, सुराष्ट्र आदि।
  2. राजशब्दोपजीवी- ऐसे गणराज्य जो राजा की उपाधि का प्रयोग करते थे।
कौटिल्य द्वारा उल्लिखित उपरोक्त दो प्रकार के गणराज्यों के अतिरिक्त एक अन्य प्रकार के गणराज्य 'आयुधजीवी गणराज्य' का भी उल्लेख मिलता है।
आयुधजीवी संघ के लोग मुख्यत: युद्ध में सैनिक होते थे ये कुशल योद्धा होते थे।

जानने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • सर्वप्रथम 1903 में 'रिज डेविड्स' ने साम्राज्यवादी दृष्टिकोण को चुनौती देने के लिए गणराज्यों की खोज की।
  • भृगु गणतंत्र विंध्य पर्वत में स्थित था (आधुनिक मध्यप्रदेश तक)

सामान्य तौर पर गणराज्य को तीन श्रेणियों में बांटा गया था-
प्रथम श्रेणी • जिसमें एक ही कुल के लोगों का वर्चस्व होता था जैसे - मालव, शाक्य, शिबी आदि
द्वितीय श्रेणी • एक से अधिक कुलों द्वारा एक साथ मिलकर बनाये गये थे, जैसे-वज्जि
तृतीय श्रेणी • एक से अधिक गणराज्य एक साथ मिलकर संघ गणराज्य के रूप में कार्य करते थे, जैसे - यौधेय, क्षुद्रक संघ आदि।

प्रमुख गणराज्य

वज्जि महाजनपद
बुद्धकाल का सबसे शक्तिशाली गणराज्य था इसकी राजधानी वैशाली थी जो वर्तमान में 'बसाढ़' नामक स्थान में स्थित है।
इस गणराज्य में कुल 8 कुल शामिल थे इनमें प्रमुख थे - लिच्छवि, वज्जि, विदेह, मल्लक, ज्ञातृक गण आदि ।
लिच्छवियों ने महात्माबुद्ध के निवास के लिए महावन में प्रसिद्ध 'कूटागारशाला' का निर्माण करवाया था ।
जैन साहित्य से पता चलता है कि अजातशत्रु (मगध का शासक) के विरूद्ध वज्जि संघ प्रमुख 'चेटक' ने मल्ल, काशी और कौशल के साथ मिलकर एक सम्मिलित मोर्चा बनाया था।

मल्ल गणराज्य
  1. कुशीनारा के मल्ल
  2. पावा के मल्ल

(i) कुशीनारा के मल्ल
  • कुशीनारा की पहचान उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थित वर्तमान 'कसया' नामक स्थान से की जाती है
  • वाल्मीकि रामायण में मल्लों को लक्ष्मण के पुत्र 'चन्द्रकेतु मल्ल' का वंशज कहा गया है।

(ii) पावा के मल्ल
  • आधुनिक देवरिया जिले में स्थित पडरौना नामक स्थान।
  • मल्ल सैनिक प्रवृत्ति के लोग
  • अजातशत्रु ने लिच्छवियों को हराने के बाद मल्लों को भी पराजित किया था।

कपिलवस्तु के शाक्य

वर्तमान सिद्धार्थनगर जिले के 'पिपरहवा' नामक स्थान
राजधानी - कपिलवस्तु , कपिलवस्तु की पहचान नेपाल में स्थित आधुनिक 'तिलौराकोट' से की जाती है।
इसमें लगभग 80 हजार परिवार थे। प्रमुख नगर - यातुमा, देवदह, सामगाम खोमदुस्स, सिलावती, नगरक, सक्कर आदि ।
गौतम बुद्ध का जन्म इसी गणराज्य में हुआ था
ये अपने रक्त पर अभिमान करते थे इसलिए अपनी जाति से बाहर वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं करते थे।

सुमसुमार पर्वत के भग्ग • ऐतरेय ब्राह्मण में उल्लिखित 'भर्ग वंश' से संबंधित
• विंध्य क्षेत्र की यमुना तथा सोन नदियों के बीच का प्रदेश
• ये वत्स राज्य की अधीनता स्वीकार करते थे
अलकप्प के बुलि • यह गणराज्य आधुनिक बिहार के भोजपुर में स्थित है।
• बुलियों का वेठद्वीप (बेतिया) के साथ घनिष्ठ संबंध था
• बौद्ध धर्म के अनुयायी
• बुद्ध की मृत्यु के बाद बुलियों ने उनके अवशेषों का एक भाग प्राप्त किया तथा उस पर स्तूप का निर्माण कराया।
केसपुत्त के कलाम • इनका संबंध पाञ्चाल जनपद के केशियों के साथ था
• वर्तमान उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के कुड़वार से लेकर पालिया नामक स्थान तक फैला है।
• इसी गणराज्य के 'आलार कलाम' नामक आचार्य से महात्मा बुद्ध ने गृह त्याग के बाद सर्वप्रथम उपदेश ग्रहण किया था।
• ये लोग कोशल की अधीनता स्वीकार करते थे।
रामगाम (रामग्राम) के कोलिय • इनकी राजधानी 'रामग्राम' थी, वर्तमान गोरखपुर जिले में स्थित रामगढ़ ताल से इसकी पहचान की जाती है।
• ये लोग पुलिस शक्ति के लिए प्रसिद्ध थे।
• कोलिय गणराज्य शाक्य गणराज्य के पूर्व में स्थित था। दोनों गणराज्यों के बीच रोहिणी नदी बहती थी जो दोनों गणराज्य के लिए सिंचाई का साधन था।
पिप्पलिवन के मोरिय • पिप्पलिवन की पहचान गोरखपुर जिले में कुसुम्ही के पास स्थित 'राजधानी' नामक ग्राम से किया जाता है।
• कोशल नरेश विडूडभ के अत्याचारों से बचने के लिए वे हिमालय क्षेत्र की ओर भाग गये
• मोरिय शब्द से ही मौर्य शब्द बना है, ऐसा माना जाता है कि चन्द्रगुप्त मौर्य इसी परिवार में उत्पन्न हुआ था।
मिथिला के विदेह • मिथिला में विस्तृत गणराज्य, जिसकी राजधानी वर्तमान जनकपुर थी। यहाँ राजा जनक अपनी शक्ति एवं दार्शनिक ज्ञान के लिए विख्यात थे।
• विदेह बुद्धकाल में वज्जि संघ का सदस्य था।
• बुद्ध काल में जनकपुर एक व्यापारिक नगर था

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कार्यपालिका के रूप में संस्थागार • कार्यपालिका का अध्यक्ष राजा होता था
• शासन चलाने के लिए उच्च पदाधिकारियों की नियुक्ति
• राजा के सहयोग के लिए मंत्रिपरिषद (4 से 20 सदस्य तक)
• राज्य छोटी-छोटी प्रशासनिक ईकाइयों में विभक्त तथा प्रत्येक ईकाई का एक अध्यक्ष होता था।
विधायिका के रूप में संस्थागार • संस्थागार के सदस्य प्रत्येक छोटी-छोटी प्रशासनिक ईकाइयों के अध्यक्ष होते थे
• 'आसनपन्नायक' संस्थागार का प्रमुख पदाधिकारी
• न्याय बहुमत आधारित पद्धति पर
• मत के लिए छन्द शब्द का प्रयोग, गुप्त मतदान प्रणाली की प्रथा
• 'श्लाका ग्राहक' संस्थागार का शीर्ष अधिकारी होता था।
न्यायपालिका के रूप में संस्थागार • संस्थागार (केन्द्रीय समिति) न्याय का भी कार्य करती थी。
• बुद्धघोष की टीका 'सुमंगलविलासिनी' के अनुसार वज्जिसंघ में आठ (8) न्यायालय होते थे।
• कोई व्यक्ति तभी दण्डित किया जाता था जब आठों न्यायालयों द्वारा दोषी ठहराया गया हो।
• प्रत्येक न्यायालय दोषी को स्वतंत्र करने का अधिकार रखता था
• संस्थागार अंतिम न्यायालय होता था।
• राजा दण्ड देते समय 'पवेनिपोट्ठक' अर्थात पूर्व दृष्टान्तों का अनुसरण करता था।

सुमंगलविलासिनी में बताए गए 8 न्यायालयों के प्रधान अधिकारी
  1. विनिच्चय महामात्त (विनिश्चय महामात्र)
  2. वोहारिक (व्यावहारिक)
  3. सूत्ताधार (सूत्रधार)
  4. अट्ठकुलक (अष्टकुलक)
  5. भाण्डागारिक
  6. सेनापति
  7. उपराजा
  8. राजा

गणराज्यों के पतन के कारण

  • शासन में उच्च पदों का आनुवंशिक हो जाना
  • आपसी फूट व विस्तारवादी नीति
  • सहमति से निर्णय न लेना व स्थायी सेना का ना होना

अन्य महत्वपूर्ण गणराज्य

  • विदेह - (राजधानी-मिथिला)
  • कांति - (उत्तर बिहार मे स्थित, वाज्जि संघ का हिस्सा)                                        
  • मालव - (मध्य-भारत मे स्थित)
  • कुरु - (कुरुक्षेत्र में स्थित)
  • पांचाल - (उत्तर-भारत मे स्थित)
  • मोरिय - (मगध मे स्थित)
  • कोशल - (अयोध्या में स्थित)
  • यौधेय - (हरियाणा एवं राजस्थान क्षेत्र में फैला हुआ)
  • अंधक - वृष्णि संघ - (मथुरा और उसके आस-पास के क्षेत्रों में स्थित)
  • कम्बोज - (आधुनिक अफगानिस्तान तथा उत्तरी-भारत के कुछ हिस्सों में)
  • वृष्णि - (कृष्ण के वृष्णि कुल से सम्बन्धित मथुरा में स्थित)
  • बुलि - कुरुक्षेत्र में स्थित महाभारत काल से जुड़ा हुआ
  • कैकय - वर्तमान पाकिस्तान के पश्चिमी भाग में स्थित

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।