स्मृति ग्रन्थ | smriti granth

स्मृति ग्रन्थ

मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन के विविध कार्यों के नियमों का विधान स्मृति साहित्य में मिलता है। स्मृतियाँ हिन्दू धर्म के चरम विकास को सूचित करता है।
दूसरी शताब्दी से लेकर पूर्व मध्यकाल तक विभिन्न स्मृति ग्रन्थों की रचना की गई। इनकी संख्या विभिन्न ग्रंथो में भिन्न-भिन्न मिलती है।
पद्मपुराण में - 36 , वृद्ध गौतम में 56 व वीरमित्रोदय में 57 स्मृतिग्रंथों का उल्लेख है।
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इनमें से निम्न 18 स्मृति ग्रन्थ प्रमुख हैं -
  1. देवल स्मृति
  2. यम स्मृति
  3. संवर्त स्मृति
  4. याज्ञवल्क्य स्मृति
  5. विष्णु स्मृति
  6. व्यास स्मृति
  7. नारद स्मृति
  8. अत्रि स्मृति
  9. दक्ष स्मृति
  10. पराशर स्मृति
  11. हारीत स्मृति
  12. गौतम स्मृति
  13. बृहस्पति स्मृति
  14. औशनस स्मृति
  15. विशिष्ठ स्मृति
  16. कात्यायन स्मृति
  17. अंगिरा स्मृति
  18. आपस्तम्ब स्मृति
उपरोक्त स्मृतियों में मनुस्मृति सबसे प्राचीन व प्रमाणिक है। इसकी रचना शुंगकाल (ई.पू. द्वितीय शती) के लगभग हुई थी। शेष स्मृति की रचना गुप्तकाल के आस-पास हुई थी।
  • विष्णु स्मृति गद्य शैली में लिखी गई है जबकि शेष सभी स्मृतियाँ पद्य/श्लोकों में लिखी गई है।
  • मनुस्मृति में वर्ण-व्यवस्था के सिद्धान्तों का स्पष्ट निर्धारण मिलता है।
  • इसमें ब्राह्मणों को विशिष्ट कर्म अध्ययन एवं अध्यापन जबकि प्रजा रक्षण, दान, यज्ञ, वेद पठन तथा विषयों में आशक्ति क्षत्रिय का कर्तव्य बताया गया है।

मनुस्मृति में बताए गए सात (7) प्रकार के दास
  • ध्वजाहृत - युद्ध में बन्दी बनाए गए दास
  • भक्तदास - भोजन पाने की लालच में बना दास
  • गृहज - घर में उत्पन्न दासी पुत्र
  • क्रीत - खरीदा गया दास
  • दत्रिम - किसी के द्वारा उपहार में दिया गया दास
  • पैतृक - पितृपरम्परा से चला आता हुआ दास
  • दण्डदास - ऋण न चुका पाने से बनाया गया दास
मनुस्मृति में विधवाओं के लिए मुण्डन का विधान किया गया है।

मनुस्मृति में अध्यापक के दो प्रकार
  1. उपाध्याय - जीविका के लिए अध्यापन कार्य करने वाले
  2. आचार्य - निःशुल्क अध्यापन कार्य करने वाले

याज्ञवल्क्य स्मृति
इस स्मृति के टीकाकार विश्वरूप, विज्ञानेश्वर, अपरार्क आदि हैं।
मनु स्मृति याज्ञवल्क्य स्मृति
• मनु ने ब्राह्मण को शूद्र कन्या के साथ विवाह की अनुमति दी है। • याज्ञवल्क्य ने इसका विरोध किया।
• नियोग प्रथा की निन्दा • नियोग प्रथा का समर्थन
• विधवा उत्तराधिकार के विषय में कुछ नहीं कहा • विधवा को समस्त उत्तराधिकार में प्रथम स्थान दिया
• स्त्रियों को स्त्रीधन के अतिरिक्त संपत्ति में अधिकार नहीं • स्त्रियों को सर्वप्रथम संपत्ति में अधिकार प्रदान किया।
• मनु द्यूत (जुआ) के विरोधी • जुआ राज्य के आय के एक साधन के रूप में ।

नियोग प्रथा

प्राचीन काल में पति के संतानोत्पत्ति में अक्षम रहने व जीवित न रहने पर वंश आगे बढ़ाने के लिए अन्य पुरुष (देवर) से संबंध बनाकर संतानोत्पत्ति कर सकती थी

नारद स्मृति • सर्वप्रथम दासों की मुक्ति का विधान इसमें मिलता है।
• गुप्तकालीन स्मृति
• नियोग प्रथा व पुनर्विवाह की अनुमति
• स्वर्ण मुद्रा - दीनार
विष्णु स्मृति • गद्य में लिखी गई
• गुप्तकालीन स्मृति
• मुद्राओं का अधिक विकसित रूप जैसे -
3 यव = 1 कृष्णल      5 कृष्णल = 1 माष
16 कृष्णल = 1 धरण      12 मास = 1 अक्षार्ध
1 अक्षार्ध + 4 माष = 1 सुवर्ण      4 सुवर्ण = 1 निष्क
देवल स्मृति • पूर्व मध्यकालीन स्मृति
• इसमें उन हिन्दुओं को हिन्दू धर्म में शामिल करने का विधान मिलता है जिन्होंने मुस्लिम धर्म अपना लिया था। यह विधि विषयक नहीं।

स्मृति ग्रंथ से संबंधित प्रमुख रचनाएँ
पुस्तक रचनाकार
स्मृति चन्द्रिका देवण भट्ट
आचारादर्श श्रीदत्त उपाध्याय
पराशरमाधव मधवाचार्य
दायभाग जीमूतवाहन
स्मृतितत्व रघुनन्दन

वेदान्त, दार्शनिक और उनके मत
दार्शनिक दार्शनिक सिद्धांत मोक्ष प्राप्ति के साधन
शंकराचार्य अद्वैतवाद ज्ञान
रामानुज विशिष्टाद्वैतवाद भक्ति
मध्वाचार्य द्वैतवाद भक्ति
वल्लभाचार्य शुद्धाद्वैतवाद भक्ति
निम्बार्काचार्य द्वैताद्वैत वाद भक्ति
चैतन्य अचिन्त्य भेदा भेद वाद भक्ति

  • 800 से 600 ई०पू० का काल - ब्राह्मण युग से संबंधित
  • राजत्व के दैवीय उत्पत्ति सिद्धांत का उल्लेख - ऐतरेय ब्राह्मण में
  • 'समुद्र पर्यंत पृथ्वी के शासक को एकराट' का उल्लेख - ऐतरेय ब्राह्मण में
  • विदेह माधव (ऋषि गौतम राहुगण से संबंधित) - शतपथ ब्राह्मण
  • 'पुनर्जन्म' सिद्धांत का उल्लेख - शतपथ ब्राह्मण में
  • पति की अर्धांगिनी की व्याख्या - शतपथ ब्राह्मण में
  • कुरु और पांचाल का वैदिक सभ्यता में सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधित्व - शतपथ ब्राह्मण में
  • रत्नियों की सूची का वर्णन - शतपथ ब्राह्मण में
  • महाजल प्लावन की कथा (मनु की रक्षा) - शतपथ ब्राह्मण में
  • विदेह माधव और गौतम राहुगण की पूर्व दिशा यात्रा का वर्णन - शतपथ ब्राह्मण में
  • धार्मिक कर्मकांड का विस्तृत वर्णन - शतपथ ब्राह्मण में
  • भगवद्गीता - महाभारत का एक अंश, जिसमें श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्मयोग, भक्तियोग, और ज्ञानयोग का उपदेश दिया।
  • धर्मसूत्र - ये ग्रंथ समाज के नैतिक और धार्मिक नियमों का उल्लेख करते हैं, जैसे गौतम धर्मसूत्र।
  • महापुराण - 18 महापुराणों में सबसे प्रमुख हैं विष्णु पुराण, शिव पुराण, और मार्कंडेय पुराण।
  • अथर्ववेद के प्रमुख मंत्र - औषधि, तंत्र-मंत्र और स्वास्थ्य संबंधित मंत्रों का संग्रह, जो मानव जीवन के लिए उपयोगी हैं।
  • वेदों की रचना - भारतीय परंपरा में वेदों को ‘अपौरुषेय’ माना जाता है, यानी इन्हें मानव ने नहीं, बल्कि ऋषियों ने दिव्य अनुभव से सुना था।
  • गीता में निष्काम कर्म योग - श्रीकृष्ण ने गीता में कर्म करने पर बल दिया है, लेकिन फल की चिंता न करने की शिक्षा दी है।
  • बृहदारण्यक उपनिषद - इसमें ‘नेति-नेति’ (न यह, न वह) के सिद्धांत से ब्रह्म का वर्णन किया गया है।
  • छांदोग्य उपनिषद - इसमें ‘तत्त्वमसि’ (तुम वही हो) का महत्त्वपूर्ण अद्वैत वेदांत सिद्धांत है।
  • शिव संहिता - यह योग और तंत्र के सिद्धांतों का प्राचीन ग्रंथ है, जो भगवान शिव द्वारा प्रतिपादित है।
  • तैत्तिरीय उपनिषद - इसमें आत्मा और ब्रह्म के रहस्यों का गूढ़ वर्णन किया गया है, और ‘सत्यं वद, धर्मं चर’ का उपदेश दिया गया है।

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।