बैगा जनजाति की सामाजिक परंपराएं | baiga janjati ki samajik paramparayen

बैगा जनजाति की सामाजिक परंपराएं

बैगा जनजाति की सामाजिक परंपराएं
  • जन्म संस्कार
  • विवाह
  • मृत्यु संस्कार
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जन्म संस्कार

बैगा जनजाति में शिशु जन्म को उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
शिशु के जन्म के समय सभी प्रकार के धान को मिलाकर रखने की प्रथा को बारदिना कहा जाता है।

विवाह एवं विवाह प्रथाएँ

  • बैगा जनजाति में सगोत्र विवाह वर्जित है
  • बैगा में बहुपत्नी प्रथा प्रचलित है।
  • बैगा जनजाति के सन्दर्भ में करस कौआ की स्थापना विवाह के समय की जाती है।
  • इस जनजाति में छह प्रकार के विवाह का प्रचलन है उधारिया विवाह, मंगनी विवाह, चढ़ विवाह, चोर विवाह, लमसेना विवाह व पैठुल विवाह।

बैगा जनजाति के प्रमुख विवाह

उठवा विवाह
इसमे विवाह का खर्च वर पक्ष उठाता है इसलिए इसे उठवा विवाह कहा जाता है।

उधारिया विवाह
इस विवाह में युवक-युवती बिना परिवार की सहमति के करीबी रिश्तेदार की सहायता से विवाह करते हैं।

मंगनी/चढ़ विवाह
इस विवाह में लड़के का पिता कन्या के घर जाकर विवाह निश्चित करता है।

चोर विवाह
इस विवाह में लड़का लड़की घर से भाग कर विवाह करते हैं।

लमसेना विवाह
इस विवाह में लड़का, लड़की के पिता के यहाँ रहकर उनकी सेवा करता है इसे घर दामाद विवाह भी कहते हैं।

पैठुल विवाह
इस विवाह में लड़की अपनी इच्छा से विवाह हेतु लड़के के घर चली जाती है।

मृत्यु संस्कार
बैगा जनजाति में मृत्यु संस्कार हेतु दाह संस्कार का प्रचलन है।

बैगा जनजाति में मृत्यु संस्कार

बैगा जनजाति में मृत्यु संस्कार हेतु दाह संस्कार के साथ दफनाने की प्रथा का भी प्रचलन है।
  • नहावल प्रथा : मृतक के अंतिम संस्कार में नगाड़ा बजाया जाता है।
  • सामरा प्रथा : आत्मा की मुक्ति हेतु मुँह में सोने व चांदी का सिक्का रखा जाता है।

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प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।