बैगा जनजाति की सामाजिक संरचना | baiga janjati ki samajik sanrachna

बैगा जनजाति की सामाजिक संरचना

  • परिवार
  • उपजातियां
  • निवास
  • खान-पान
  • वस्त्र व आभूषण
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परिवार

बैगा समाज पितृ वंशीय सामाजिक व्यवस्था से संबंधित होते है।
बैगा समाज पुरुष प्रधान समाज है, इस समाज में एकल परिवार की प्रधानता होती है।
बैगा समाज में स्त्रियों को अत्यधिक सम्मान प्राप्त है।

उपजनजाति

बैगा जनजाति की उपजनजाति बिंझवार, नरोतिया, भरोतिया, नाहर, रायमैना, कठमैना हैं।

बैगा जनजाति की उपजातियां

बिंझवार
यह बैगाओं की सबसे सभ्य उपजाति है। स्वयं को विंध्याचल व विंध्यवार कहलाना पसंद करते हैं।
ये जमींदार होते हैं।

मुण्डिपा
यह जनजाति मूँछे नही रखती हैं।

भरोतिया 
इनका बैगाओं में उच्च स्थान है, ये जंगलों में निवास करते है।
भरोतिया  द्वारा हल का प्रयोग नही किया जाता है
भरोतिया  का अर्थ - भरता या भरण पोषण करने वाला

रायमैना
इन्हे रमैनाभी कहा जाता है।

कठमैना/कोडवन
यह काठ पर अपना काम करते हैं।

गोंडमैना
इनका स्थान सबसे नीचे माना जाता है।

गोत्र

बैगा मे गोत्र प्रथा का प्रचलन प्रमुखता से है।
बैगा जनजाति में जात कर्म, गुण निवास आदि के आधार पर विभिन्नगोत्र विभाजित हैं।
प्रमुख गोत्र हाडा (कर्म के आधार पर) निधुनिया (गुण के आधार पर)घंघरिया (निवास स्थान के आधार पर) मरावी, धुर्वे, मरकाम,परतेती एवं टेकाम आदि।
प्रत्येक जनजाति का एक गढ़ होता है जिसे जतका, जात एवं ततकागढ़ कहा जाता है।

सामाजिक संगठन

बैगा समाज में पंचायत का विशेष महत्व है
बैगा पंचायत के पंच - मुकद्दम, दीवान, समरथ, कोटवार, दवार।

बैगा पंचायत के पंच

मुकद्दम
यह गांव का मुखिया एवं प्रबंधक होता है।

दीवान
यह मुकद्दम का सहायक होता है जो मुकद्दम की अनुपस्थिति में गांव के सारे कार्य की देखभाल करता है।

समरथ
गांव मे सामाजिक कार्यो को सम्पन्न कराता है तथा प्रशासनिक अधिकारियों की सहायता करता है।

दवार
यह गांव का पुरोहित या पण्डा होता है।

कोटवार
यह ग्रामीण क्षेत्रों में सेवक के रूप में कार्य करता है।

निवास

बैगा घने जंगलों में निवास करते हैं, इनके घर बाँस और मिट्टी के बने होते हैं।
बैगाओं के गांव को टोला या पूर्वा कहते हैं।
इनका घर लकड़ियों की सुरक्षा दीवारों से घिरा होता है जिसे मेटी कहते हैं।

खान-पान

बैगा शाकाहारी व मांसाहारी दोनों होते हैं इनका मुख्य भोजन पेज है जिसे कोदो-कुटकी और मक्का से बनाया जाता है।
बैगा जनजाति में सुबह के भोजन को बासी, दोपहर के भोजन को पेज एवं शाम के भोजन को बियारी कहते हैं।
बैगा जनजाति में सुअर मांस का विशेष प्रचलन है।

वस्त्र एवं आभूषण

बैगा जनजाति में पुरुषों के वस्त्र को पटका जबकि महिलाएँ कमर से घुटनों के ऊपर तक कपची नामक वस्त्र पहनती हैं।
महिलाएँ गले में सुतिया, हवेल तथा बाहों में हरैया नामक आभूषण पहनती हैं।
बैगा जनजाति में गोदना का अत्यधिक प्रचलन है।
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को MPPSC, MPESB (Vyapam), MP Police, Patwari, Forest Guard और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।