अनुसूचित जनजाति: सामान्य परिचय
जनजाति वह सामाजिक समुदाय हैं जो राज्य के विकास के पूर्व अस्तित्व में था या जो अब भी राज्य के विकास के निचले पायदान पर स्थित है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 366 (25) के अन्तर्गत उल्लेखित उन जनजातीय समुदायों या उनके समूह से हैं, जिनका वर्णन संविधान के अनुच्छेद 342 (1) में अनुसूचित जनजातियों के रूप में हुआ है।
प्राचीन भारतीय साहित्य में आदिवासियों को वनवासी या अटविका कहा गया है।
जनजाति की परिभाषा
- 'जनजाति' शब्द से अभिप्राय है, 'आदिम अथवा बर्बर समूह में निवास करने वाले लोगों का एक समूह है जो एक मुखिया की सत्ता स्वीकारते हों तथा साधारणतया उसे अपना पूर्वज मानते हों। [आक्सफोर्ड शब्दकोश]
- 'जनजाति' समान संस्कृति वाली जनसंख्या का एक स्वतन्त्र राजनीतिक विभाजन है। [लूसी मेयर]
- 'जनजाति' क्षेत्रीय सम्बन्ध युक्त तथा अंत: विवाही सामाजिक समूह है जिसके कार्यों में कोई विशेषज्ञता नहीं होती है। [डी एन मजूमदार]
- एक जनजाति को तकनीकी, आर्थिक, सास्कृतिक विकास एवं मनुष्य और प्रकृति के सम्बन्ध में एक चरण के रूप में समझा जाना चाहिए। [बी के राय बर्मन]
विभिन्न विद्वानों द्वारा अनुसूचित जनजाति के लिए दी गई परिभाषाओं के अन्तर्गत जनजातियों की प्रमुख विशेषता -
- एक निश्चित भू-भाग में निवास
- परिवारों के समूह का संकलन
- प्रत्येक जनजाति का विशिष्ट नाम
- प्रत्येक जनजाति का एक विशिष्ट सामाजिक संगठन
- प्रत्येक जनजाति की एक सामान्य संस्कृति
- विशिष्ट आर्थिक विनिमय प्रणाली
विभिन्न विद्वानों द्वारा जनजातियों को दिए गए नाम
| नाम | द्वारा दिया गया |
|---|---|
| अनुसूचित जनजाति | भारतीय संविधान |
| दलित वर्ग | अंग्रेज (ब्रिटिश) |
| हरिजन | महात्मा गांधी |
| पिछड़े हिन्दू | डा. गोविन्द सदाशिव घुर्ये |
| पहाड़ी जनजाति | ग्रियर्सन |
| आदिवासी | काका कालेकर, ठक्कर बापा, श्री लेसी, श्री एल्विन |

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