जनजातियों का भौगोलिक वितरण | janjatiyon ka bhaugolik vitran

जनजातियों का भौगोलिक वितरण

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पूर्वी जनजातीय प्रदेश

इस क्षेत्र में रहने वाली मुख्य जनजाति गोंड, कोल और बैगा है।
रीवा के पठार में कोल जनजाति का विस्तार है।
पूर्वी क्षेत्र में जनजातीय जनसंख्या 2150235 है जो कुल जनजातीय जनसंख्या का 14% है।
इसके अर्न्तगत सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, सीधी, कटनी आदि जिले आते हैं।

पश्चिमी जनजाति प्रदेश

इस क्षेत्र में रहने वाली प्रमुख जनजाति भील, भिलाला, पटेरिया आदि हैं।
पश्चिमी क्षेत्र में रहने वाली जनजाति की जनसंख्या 5554666 है जो कुल जनजातीय जनसंख्या का 36.27 प्रतिशत है।
इस क्षेत्र में जनजाति संख्या प्रदेश में सर्वाधिक है इस क्षेत्र में धार, अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन, खंडवा आदि जिले हैं।

उत्तरी जनजाति प्रदेश

इस क्षेत्र में रहने वाली मुख्य जनजाति सहरिया हैं।
इसके अर्न्तगत शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड आदि क्षेत्र आते हैं।

मध्य व दक्षिणी जनजातीय प्रदेश

इसके अन्तर्गत गोंड, भारिया, कोरकू, बैगा, परधान आदि जनजाति आती है।
इस क्षेत्र में रहने वाली जनजातियों की कुल जनसंख्या 3565673 है जो कि कुल जनजाति जनसंख्या का 23.28% है।
इसके अन्तर्गत मंडला, डिंडौरी, सिवनी, छिंदवाड़ा, हरदा, बालाघाट, होशंगाबाद आदि जिले आते हैं।
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प्रमुख जनजातियों का संकेंद्रण
भील धार, बड़वानी, झाबुआ, खरगोन, अलीराजपुर
गौंड मंडला, बैतूल, सिवनी, डिंडोरी, बालाघाट, जबलपुर, अनूपपुर
कोल रीवा, सतना, सीधी, कटनी, शहडोल, जबलपुर
कोरकू बैतूल, खण्डवा, हरदा, देवास, बुरहानपुर, होशंगाबाद
सहरिया शिवपुरी, श्योपुर, अशोकनगर, गुना, ग्वालियर
बैगा शहडोल, उमरिया, सिंगरौली, मंडला, डिंडोरी. अनूपपुर
कोल रीवा, सतना, सीधी, कटनी, शहडोल, जबलपुर
भारिया छिंदवाड़ा, जबलपुर, डिंडोरी
सौर सागर, टीकमगढ़, छतरपुर
परधान सिवनी, छिंदवाड़ा, मंडला, डिंडोरी, जबलपुर, बैतूल, बालाघाट
पनिका/अगरिया सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, सीधी, उमरिया
खैरवार छतरपुर, सिंगरौली, पन्ना, शहडोल, सतना
कंवार शहडोल, अनूपपुर, खण्डवा
बंझवार बालाघाट और सिवनी

मध्य प्रदेश में संभाग अनुसार जनजातियों का वितरण

मध्य प्रदेश में जनजातियों की संख्या के संभाग अनुसार बाँटा गया है, जिसके तहत 7 संभाग व 21 जिले अनुसूचित जनजाति के लिए चिन्हित है, तथा इसके अन्तर्गत 89 विकासखण्डों को अनुसूचित विकासखण्ड के रूप में नामित किया गया है। इनका विवरण निम्न है।
संभाग जिला (विकास खण्ड)
1. जबलपुर मण्डला (9), सिवनी (5), छिंदवाड़ा (3), पांढुर्ना (1) बालाघाट (3), डिंडोरी (7)
2. इन्दौर खण्डवा (1), खरगोन (7), बड़वानी (7), झाबुआ (6) अलीराजपुर (6), बुरहानपुर (1), धार (12)
3. नर्मदापुरम नर्मदापुरम (1), बैतूल (7)
4. उज्जैन रतलाम (2)
5. शहडोल शहडोल (4), अनूपपुर (4), उमरिया (1)
6. रीवा सीधी (1)
7. चम्बल श्योपुर

विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs)

परिचय
  • पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) आदिवासी समूहों के बीच अधिक संवेदनशील।
  • 1993 में 23 समूहों को और सूची में जोड़ा गया।
  • अभी 705 अनुसूचित जनजातियों में 75 पीवीटीजी हैं।
  • ओडिशा में पीवीटीजी की संख्या सबसे अधिक है।
  • पीवीटीजी देश में 18 राज्यों व 1 केन्द्र-शासित प्रदेश में फैले हुए हैं। (2011 की जनगणना से)

विशेषताएँ
  • जनसंख्या - स्थिर/गिरावट
  • प्रौद्योगिकी - पूर्व कृषि
  • साक्षरता स्तर - बेहद कम
  • अर्थव्यवस्था - निर्वाह स्तर

अन्य प्रावधान
भारत सरकार द्वारा 'पर्यावास क्षेत्र का अधिकार' को वनाधिकार कानूनों के अन्तर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों को प्रदान किया गया है।

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।