आरण्यक ग्रंथ | Aranyak granth

आरण्यक ग्रंथ

आरण्यक ग्रंथ ब्राह्मण ग्रंथों के अंतिम भाग हैं। इनकी रचना अरण्यों अर्थात जंगलों में पढ़ाए जाने के निमित्त की गई थी। इसी कारण इसे इन्हें अरण्यक कहा गया।
aranyak-granth
  • अरण्यकों में यज्ञ के स्थान पर ज्ञान व चिन्तन की प्रधानता है। इनमें रहस्यात्मक तथा दर्शन-संबंधी विषयों यथा- आत्मा, मृत्यु जीवन आदि का वर्णन।
  • अरण्यक ग्रंथों से कालांतर में उपनिषदों का विकास हुआ।

प्रमुख आरण्यक ग्रंथ
वेद अरण्यक
ऋग्वेद ऐतरेय अरण्यक, शांखायन (कौषीतकी) अरण्यक
यजुर्वेद तैत्तिरीय, माध्यन्दिन वृहदारण्यक, शतपथ अरण्यक
सामवेद जैमिनीय तथा छांदोग्य अरण्यक
अथर्ववेद कोई नहीं

18 पुराण
ब्रह्म मार्कण्डेय स्कन्द
पद्म अग्नि वामन
विष्णु भविष्य कूर्म
शिव ब्रह्मवैवर्त मत्स्य
भागवत लिंग गरुड़
नारद वाराह ब्रह्माण्ड
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Kartik Budholiya

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मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को MPPSC, MPESB (Vyapam), MP Police, Patwari, Forest Guard और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।