ब्राह्मण ग्रन्थ
संहिता के पश्चात वैदिक साहित्य में ब्राह्मण ग्रंथों का स्थान आता है। इनकी रचना यज्ञ के विधान तथा उसकी क्रिया को समझाने के लिए की गई। ब्रह्मा का अर्थ यज्ञ होता है।
प्रत्येक वेद के लिए अलग - अलग ब्राह्मण ग्रंथ लिखे गए, इनका विवरण निम्नलिखित है -
| वेद | ब्राह्मण ग्रंथ |
|---|---|
| ऋग्वेद | ऐतरेय तथा कौषीतकी ब्राह्मण |
| यजुर्वेद | तैत्तिरीय (कृष्ण यजुर्वेद), शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद) |
| सामवेद | पञ्चविंश, षडविंश, अद्भुत व जैमिनी ब्राह्मण |
| अथर्ववेद | गोपथ ब्राह्मण |
- शतपथ ब्राह्मण सबसे बड़ा तथा सबसे प्राचीन ब्राह्मण ग्रंथ है। शतपथ ब्राह्मण में गांधार, शल्य, कैकेय, कुरु, पांचाल, कोशल, विदेह आदि के राजाओं का वर्णन है
- ऐतरेय ब्राह्मण में जहाँ राज्याभिषेक के नियम का वर्णन है वहीं शतपथ ब्राह्मण में राज्याभिषेक के समय ली जाने वाली शपथ का वर्णन है ।
- ऐतरेय ब्राह्मण में 'विष्णु' को परम देवता कहा गया।
- पंचविंश ब्राह्मण में यज्ञ संबंधी कर्मकाण्डों का वर्णन है।
प्रमुख ब्राह्मण ग्रंथ और उनके रचयिता
| ऐतरेय ब्राह्मण | ऋषि ऐतरेय महिदास |
| कौषीतकि ब्राह्मण | ऋषि कुषितक |
| शतपथ ब्राह्मण | याज्ञवल्क्य |
| गोपथ ब्राह्मण | गोपथ ऋषि |


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