बैगा जनजाति - परिचय, भौगोलिक, विस्तार, जनसंख्या, उत्पत्ति एवं विशेषता | baiga janjati

बैगा जनजाति

बैगा जनजाति
  • परिचय
  • भौगोलिक विस्तार
  • जनसंख्या
  • उत्पत्ति
baiga-janjati

परिचय

  • बैगा जनजाति मध्य प्रदेश की आदिम जनजातियाँ है, बैगा द्रविड़ समुदाय की जनजाति है।
  • यह जनजाति मध्य प्रदेश की तीन अति पिछड़ी जनजातियों में से एक है।
  • बैगा, गोंडों की उपजाति है, ये स्वयं को जंगल का राजा या प्रकृति पुत्र मानते हैं।
  • बैगा जनजाति को धरती पुत्र या 'बिछावार' से भी संबोधित किया जाता है।

भौगोलिक विस्तार

  • बैगा जनजाति मध्य प्रदेश में मंडला, बालाघाट, सीधी, सिंगरौली और शहडोल आदि जिलों में पाई जाती है।
  • यह जनजाति सतपुड़ा एवं मैकाल पर्वत श्रृंखला के मध्य अधिक संकेन्द्रित हैं।
  • मंडला जिले का बैगा चक क्षेत्र बैगा के संकेन्द्रण के लिए जाना जाता है।
  • मध्य प्रदेश के अलावा यह छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड प्रदेशों में पाई जाने वाली जनजाति है।

जनसंख्या

बैगा जनजाति की कुल जनसंख्या 4.15 लाख है जो राज्य की कुल जनजाति जनसंख्या का 2.71% है।
बैगा जनजाति सबसे अधिक मण्डला जिले में निवासरत है।
वर्ष 1941 की जनगणना में बैगा जनजाति को हिन्दू माना गया था।

उत्पत्ति

बैगा द्रविड़ समुदाय की जनजाति है। बैगा प्रोटो आस्ट्रेलायड प्रजाति का प्रतिनिधित्व करती है।
बैगा का शाब्दिक अर्थ पुरोहित होता है इसलिए इन्हें पंडा एवं बेवात भी कहा जाता है।
वैरियर एल्विन ने बैगा जनजाति पर 'द बैगा' पुस्तक लिखी, इसमें उन्होने बैगा जनजाति को आदिस्वामी एवं जादूगर या वैद्य बताया है।
बैगा की उत्पत्ति छोटा नागपुर पठार से मानी जाती है।

शारीरिक विशेषता

बैगा जनजाति का कद छोटा, रंग काला, बाल सीधे नाक चपटी व शरीर सुगठित होता है।

Post a Comment

Post a Comment (0)

Previous Post Next Post
Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।