भील जनजाति की सामाजिक संरचना | bheel janjati ki samajik sanrachna

भील जनजाति की सामाजिक संरचना

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सामाजिक संरचना
  1. परिवार
  2. उपजातियाँ
  3. निवास
  4. वस्त्र एवं आभूषण
  5. खान-पान

1. परिवार

  • पितृ सत्तात्मक व्यवस्था
  • संयुक्त परिवार प्रथा

2. उपजातियाँ

प्रमुख उपजातियाँ बरेला, भिलाला (सबसे बड़ी व महाराणा प्रताप की वंशज) पटरिया, रैथास, बैगास, भीली, माड़वी, पुजारो (औषधि व रोग उपचार में विशेषज्ञ) कोटद्वार (ग्रामीण प्रशासन की देखरेख) मदवी (सबसे पवित्र), तड़वी (औरंगजेब के समय इस्लाम धर्म को अपना लिया ये तड़वी भील कहलाए), लंगोट भील (वनों में निवास)

गोत्र
  • भील जनजाति में कुल 71 गोत्र हैं, जिनके नाम पशु पक्षी व वनस्पतियों आदि के नाम पर रखे गए हैं जैसे- जमानया, रोहिणी, अवलिया, मछरिया, मोरी तथा घोड़ा मारिया।
  • कुल 71 गोत्रों में से 48 टोटमिक गोत्र, 17 पेड़ पौधे, 19 पशु-पक्षियों तथा 12 अन्य प्राकृतिक वस्तुओं से संबधित हैं।

3. निवास

  • मिट्टी , पत्थर व बाँस के घर
  • इनके निवास को 'फाल्या' व घरों को 'कू' कहा जाता है। कई फाल्या से मिलकर एक गाँव बनता है जिसे 'पाल' कहते हैं।
  • भीलों के गाँव के मुखिया को 'गमेती' कहा जाता है।

4. वस्त्र एवं आभूषण

  • पुरूष लंगोटी व सिर पर साफा बांधते हैं।
  • महिलाएँ अंगरखा वस्त्र का प्रयोग करती हैं।
  • स्त्री व पुरूष दोनों आभूषणों के शौकीन
  • भील जनजाति गुदना प्रिय जनजाति

भील जनजाति में पहना जाने वाला प्रमुख वस्त्र
वस्त्र उपयोगिता
सिंदूरी स्त्रियों में प्रचलित लाल रंग की साड़ी
ढेपाड़ा पुरुषों द्वारा पहनी जाने वाली तंग धोती
पोत्या सिर पर पहना जाने वाला साफा
खोयतु कमर पर बांधा जाने वाला लंगोट
कच्छाबू महिलाओं का घुटने तक का घाघरा
फालू कमर का अंगोछा
अंगरूखी स्त्रियों की चोली

5. भोजन/खान पान

  • राबड़ी - मुख्य भोजन (मकई की धुली से बना)।
  • मक्के की रोटी, ताड़ी तथा ज्वार इनका प्रिय भोजन।
  • अन्य भोजनों में चवली राजा, ग्वारफली तथा भुट्टा आदि।

सामाजिक संगठन

  • भील जनजाति में सामाजिक संगठन चार रूप में पाए जाते हैं।
  • अटक (एक ही पूर्वज से उत्पन्न), आदेख, गोत्र व कुल।

हलमा परंपरा

हलमा परंपरा एक सामुदायिक परम्परा है जिसमें किसी व्यक्ति या परिवार को संकट से उबारने के लिए ग्रामीणों द्वारा सहयोग किया जाता है।
भील जनजाति हलमा जल संरक्षण परम्परा पानी बचाने के लिए करती है इसमें जनजाति समुदाय एकत्रित होकर जल संकट निदान एवं भूजल स्तर में सुधार के लिए कार्य करती हैं।
इस परंपरा को 2005 में महेश शर्मा व शिवगंगा ने एनजीओ शिवगंगा ने शुरू किया था।

भील जनजाति के प्रमुख व्यक्ति

पटेल गांव का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी व सामाजिक कार्यों में भूमिका
तड़वी यह पटेल का सहायक होता है
डाहला यह गांव का वृद्ध पुरुष होता है जो सामाजिक कार्य में भंडार गृह का कार्य देखता है।
पुजारा यह धार्मिक कार्यों को सम्पन्न करता है।
बड़वा सामाजिक कार्यों में बड़वा देवी देवताओं का भार ग्रहण करता है। यह भीलों के डाक्टर के रूप में जाना जाता है।
कोटवार यह ग्रामीण क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यों को करता है इसकी नियुक्ति पटेल द्वारा की जाती है
गायक यह बड़वा का सहायक होता है।
भांजगड़िया यह मंगनी के समय प्रक्रिया को पूरा करवाता है। भांजगड़िया दोनों परिवारों का परिचित होता है तथा मंगनी तय होने पर वधू मूल्य के लिए वर पक्ष को संदेश भेजता है।
गमेती भीलों के गाँव का मुखिया
पालवी ऊँची पहाड़ी पर रहने वाला व्यक्ति
बोलावा वह व्यक्ति जो मार्गदर्शन करने का कार्य करता है।
भोपा धार्मिक संस्कार करने वाला व्यक्ति

भील जनजाति की सामाजिक परम्पराएँ

  1. जन्म संस्कार
  2. विवाह
  3. मृत्यु संस्कार

1. जन्म संस्कार

शिशु जन्म के समय सूर्य पूजा का बड़ा महत्व
सांता प्रथा : शिशु जन्म के सात दिन बाद प्रसूता को हल्दी लगाने की प्रथा
बच्चो के 12 वर्ष के होने पर उसके दाहिने हाथ की भुजा पर तीर से दागा जाता है जिसे 'जेवडम्पा' कहा जाता है।

2. विवाह

भील युवक-युवती विवाह हेतु स्वतंत्र होते हैं। इसमें कई प्रकार के विवाह का प्रचलन है
भीलों का प्रमुख प्रणय पर्व 'भगोरिया' हैं।

घर घुसी विवाह
इसमें कन्या लड़के के घर हट पूर्वक प्रवेश कर जाती है।

परीक्षा विवाह
इसमें विवाह पूर्व लड़के के शौर्य व साहस का परीक्षण किया जाता है।

गोल - गधेड़ो विवाह
भगोरिया में युवक-युवती द्वारा अपनी पसंद से किया गया विवाह।

पलायन विवाह
लड़का - लड़की द्वारा घर से भाग कर किया गया विवाह

दापा विवाह
वधू मूल्य देकर किया गया विवाह
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दापा विवाह को समाप्त करने के लिए साथीदार (2016) अभियान प्रारम्भ किया गया है।

लुगड़ा - लाडी
संबंध तय होने पर लड़का लड़की का गठजोड़ कर घर ले आते हैं।

धारणा विवाह
एक पत्नी रहते हुए पत्नी की सहमति से किया गया दूसरा विवाह

नातारा विवाह
विधवा पुनर्विवाह

भांजगड़ा प्रथा
राजस्थान व मध्य प्रदेश में प्रचलित इस प्रथा में जब कोई विवाहित पति-पत्नी अपने साथी को छोड़कर चला जाता है तब भांजगड़ा प्रथा का प्रयोग होता है। इसमें एक पक्ष दूसरे पक्ष को एक निश्चित राशि देता है यह समझौते से जुड़ी प्रथा है।

मौताणा प्रथा
भील जनजाति में प्रचलित प्रथा, जिसमें विवाद और खून-खराबे की स्थिति में जुर्माना वसूल किया जाता है।

3. मृत्यु संस्कार

भीलों में मृत संस्कार हेतु शव को जलाने की परंपरा
  • गातला प्रथा - इस प्रथा में भील मृतक की स्मृति में शिल्प के पत्थर गाड़े जाते हैं।
  • टिया - मृतक की स्मृति में किया जाने वाला सामूहिक भोज
  • कट्टा प्रथा - भीलों में प्रचलित एक मृत्युभोज प्रथा

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।