भील जनजाति की सांस्कृतिक परंपराएं | bheel janjati ki sanskritik paramparayen

भील जनजाति की सांस्कृतिक परंपराएं

भील जनजाति की सांस्कृतिक परंपराएं
  1. नृत्य
  2. चित्रकला
  3. भाषा
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नृत्य/गान

भील जनजाति के प्रमुख नृत्य डौहिया, भगोरिया, गहर, डोहो, गरबी आदि हैं।
नृत्य / गान विशेषताएँ
डोहिया नृत्य भगोरिया हाट में प्रचलित
गहर नृत्य होली के अवसर पर होने वाला नृत्य
डोही नृत्य धार्मिक उत्सव के अवसर पर
गरबी दीपावली के अवसर पर
वीर वाल्या धार्मिक नृत्य, श्रावणमास और नवरात्री में बड़वा द्वारा किया जाने वाला नृत्य
नेजा नृत्य होली के तीसरे दिन प्रारम्भ होता है
रेलोगीत भीलों से सम्बंधित
बुबंटिया लोकगीत (भील स्त्री द्वारा गायी जाने वाली)
हमसीढ़ो युगल लोकगीत (भील स्त्री व पुरुष द्वारा)

विवाह नृत्य

पुरूष डांग साल नृत्य बारात मार्ग में स्त्री पुरूष द्वारा अलग- अलग समूह में किया गया नृत्य
लतमार साला बारात आगमन पर स्त्रियों द्वारा किया गया नृत्य
हाथी माना नृत्य नृत्य विवाह के अवसर पर भील पुरूषों द्वारा किया गया नृत्य
घोर नृत्य स्त्रियों द्वारा चिटकीटा हाथ में लेकर किया जाने वाला नृत्य
लोहरी नृत्य स्त्रियों द्वारा अर्धवृत्त बनाकर किया जाने वाला नृत्य
फरकणी नृत्य वर-वधू पक्ष के आपस में मिलने के दौरान किया जाने वाला नृत्य
परव्यों नृत्य विवाह के पश्चात वर-वधू पक्ष द्वारा एक दूसरे को गले लगाते हुए चिढ़ाकर किया गया नृत्य

भील जनजाति के प्रमुख वाद्य यंत्र

प्रमुख वाद्य यंत्र
  • बाँसुरी
  • अलगोज़ा
  • केंदि
  • केन्द्ररिया
  • कामडी
  • थाली
  • ढोल
  • मांदल
  • कुड़ी
  • ढाँक
  • फेफरया

चित्रकला

भील मांगलिक अवसरों पर विभिन्न प्रकार के भित्तिचित्र बनाते हैं। 'पिथौरा' भील जनजाति का प्रमुख भित्तिचित्र है।
इनका प्रमुख चित्र गोदना, गातला, अम्बा, कहावरी, हितारा आदि हैं।
गोतरेज कला - घरों में मांगलिक अवसर पर पशु पक्षी व फलों का चित्रांकन किया जाता है।

पिथौरा चित्रकारी
  • जोबट व अलिराजपुर क्षेत्र में प्रचलित
  • पिथौरा चित्रकारी करने वाले कलाकार को लखिंद्रा उपनाम से जाना जाता है।
  • भील जनजाति में पिथौरा चित्रांकन को पवित्र माना जाता है।

भाषा

  • भील जनजाति द्वारा भीली भाषा का प्रयोग किया जाता है।
  • मध्यप्रदेश के धार, रतलाम व झाबुआ जिलों में भीली भाषा पर मालवी का प्रभाव है।
  • खरगौन जिले में निवासरत भील निमाड़ी बोली का प्रयोग करते हैं।

भील जनजाति से जुड़े प्रसिद्ध व्यक्ति

पेमा फत्या
पिथौरा चित्रकला परम्परा के प्रसिद्ध (लखिंद्रा) कलाकार
संबंध - झाबुआ (म.प्र.)

भूरी बाई
पिथौरा चित्रकला की प्रसिद्ध कलाकार
इनका संबंध झाबुआ से है।

भील जनजाति से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • ऋषि वाल्मीकि का संबंध भील जनजाति से है।
  • भील जनजाति कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गे का पालन करती है।
  • भीलों में सगोत्र विवाह वर्जित है।
  • भीलों का महत्वपूर्ण वृक्ष ताड़ी व आस्था वाला पशु घोड़ा है।
  • भील जनजाति में मामा संबोधन लोकप्रिय है
  • भील संसार की सबसे रंगप्रिय जनजाति मानी जाती है।
  • मध्य प्रदेश का प्रथम भीली सामुदायिक रेडियो केन्द्र भावरा, अलीराजपुर में स्थित है।
  • भीलों का गांधी 'मामा बालेश्वर दयाल' को कहा जाता है।
  • घोटिया अम्बा का मेला (बांसवाड़ा) को भीलों का कुम्भ मेला कहा जाता है।
  • भील जनजाति का प्रिय खाद्य पदार्थ राबड़ी है।

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शक Kartik Budholiya को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का गहन अनुभव है। वे MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए सटीक विश्लेषण और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।