भील जनजाति - परिचय, भौगोलिक विस्तार, उत्पत्ति

परिचय

भील को भारत की सबसे पुरानी जनजातियों में से एक माना जाता है भील जनजाति मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी जनजाति तथा भारत की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है।
  • भील लोग अपना मूल स्थान राजस्थान के कुशलगढ़ के ढोलका को मानते है
  • मूलतः भील जनजाति को प्रोटो ऑस्ट्रेलायॅड परिवार का माना जाता है।
  • हीरालाल व रसेल के अनुसार भील शब्द 600 ई० में प्रयोग हुआ।
bheel-janjati

भील जनजाति

  • भौगोलिक विस्तार
  • जनसंख्या
  • उत्पत्ति

भौगोलिक विस्तार

भील जनजाति पश्चिम मध्य प्रदेश विशेषकर धार, अलीराजपुर, झाबुआ, खरगोन, बड़वानी, रतलाम आदि जिलों में पाई जाती है।
मध्य प्रदेश के अलावा यह राजस्थान, गुजरात महाराष्ट्र आदि में भी पाई जाती है।
मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्रों में भील जनजाति के साथ भिलाला, पटलिया और राँठ जनजातियाँ भी अधिवासित है।

जनसंख्या

  • भील मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी जनजाति है। 2011 की जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में भील जनसंख्या 4618068 लाख है जो प्रदेश की कुल जनजातीय जनसंख्या का 37.7% है।
  • मध्य प्रदेश में सर्वाधिक भील जनसंख्या धार जिलें (12 लाख से अधिक) में है।
शारीरिक विशेषता : सुसंगठित शरीर, गहरा भूरा रंग, काली आंखें, गोल चेहरा व सुडौल शरीर

उत्पत्ति एवं विकास

  • भील शब्द की उत्पत्ति तेलगू शब्द 'भिल्ल' से हुई जिसका अर्थ 'धनुष' है।
  • भील शब्द सर्वप्रथम कथासरित्सागर में प्रयुक्त हुआ जिसमें इन्हें विन्ध्य क्षेत्र का निवासी बताया गया है।
  • ऋग्वेद में भीलों के लिए 'अनास' शब्द प्रयुक्त हुआ है।
  • दंतकथा के अनुसार भील स्वयं को महादेव का वंशज मानते हैं।
  • डा. मजूमदार ने अपनी पुस्तक 'रेसेज एण्ड कल्चरल आफ इण्डिया' में भील जनजाति का संबंध नीग्रटो प्रजाति से बताया है।
  • कर्नल टाड ने इनको वन पुत्र और टालमी ने तीरंदाज कहा है।
Tags:

Comments

Comment करें

Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, कला-संस्कृति और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को MPPSC, MPESB (Vyapam), MP Police, Patwari, Forest Guard और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।