गोंड जनजाति की सामाजिक संरचना
गोंड जनजाति की सामाजिक संरचना
- परिवार
- उपजातियाँ
- निवास
- खान-पान
- वस्त्र एवं आभूषण
परिवार
- गोंड पितृवंशिय होते हैं परिवार का प्रधान वृद्ध पुरुष होता है।
- गांव के मुखिया को मुकद्दम कहा जाता है।
- परिवार का सबसे वृद्ध सदस्य परिवार का मुखिया होता है, परिवार में माता-पिता को दाऊ-दाई और भानजे को भाँजा कहते हैं।
- परिवार में अतिथि का विशेष महत्व होता है तथा अतिथि को भगवान का दर्जा दिया जाता है।
उपजातियाँ
गोंड जनजाति की मध्य प्रदेश में 50 उपजातियाँ हैं। इनकी महत्वपूर्ण उपजातियाँ अगरिया, प्रधान, ओझा, कोयलाभूतूस व सोलाहस है।
- गोंड समुदाय के दो वर्ग होते हैं- 1. राज गोंड (शासक वर्ग), 2. धुर गोंड (सैन्य वर्ग)
गोंडों की उपजातियाँ
- गोंड उपजाति में अत्यन्त पिछड़ी जनजाति को मुरिया/मारिया कहा जाता है।
- मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार गोंड की 50 से अधिक उपशाखाएँ हैं।
मारिया, धुरू, धुरूवा, धोबा, धुलिया, दोला, परधान, गायको, गट्टा, गैता, गोंड, गोवारी, हिल मारिया, कडरा, कलंगा, खटोला, कोईतोर, कोया, खिरवार, खैरवार, कुचामारिया, कुचाकी, मारिया, आरख, अगरिया, असुर, बड़ी मारिया, बड़ा मारिया, भटोला, भीमा, भूता, कोइला, भूता, बायसान, हार्न मारिया, छोटा मारिया, दण्डामी माना, मन्नावर (कोलम), मोम्या, मीघिया, मोह्या, नगारची, नागवंशी, ओझा, राज, सोनझरो, झारेका, मोतयावाड़े माड़िया, बड़े मारिया, दरोई आदि।
गोंड में जातीय विभाजन
अगरिया, ओझा, परधान, परजा, भतरा, गोवारी, मन्नेवार, कोलम, भूंजिया, खैरवार, कोया, गायता, उडूका, धुरवा, राजगोंड, खतौला गोंड आदि।
गोत्र
गोंड जनजाति में गोत्र को कुर कहा जाता है।
गोंड जनजाति में देवताओं के आधार पर 7 गोत्र माने गए हैं जो देवताओं के घर हैं, जो निम्न हैं-
- पराती (हँसिया)
- बसूला
- पास (बखर)
- कुसिया
- कुल्हाड़ी
- खुसी
- देव राँपी
राजगोंड में 18 गोत्र मिलते हैं, जिन्हें दूधाभाई कुर कहते हैं।
सामाजिक संगठन
गोंड जनजाति के विभिन्न विवादों को पंचायत के माध्यम से निपटाया जाता है।
पंचायत के मुखिया को मांझी, देशमुख या भोई भी कहा जाता है इसके अलावा पंचायत में मुकद्दम, दीवान तथा लिखई प्रमुख होते हैं।
गोंड जनजाति के प्रमुख व्यक्ति
मुकद्दम
इसे गेंतिया भी कहते हैं यह गाँव का मुखिया होता है। इसकी नियुक्ति परम्परागत होती है इसका मुख्य कार्य मालगुजारी वसूलना है।
कोटवार
इसका मुख्य कार्य मुकद्दम की सहायता करना है, यह जन्म मरण का हिसाब रखता है।
दीवान
गांव के मुकद्दमे की गुप्त सूचनाएं मुखिया को उपलब्ध कराता है।
लिखई
पंचायत के वृद्ध सदस्य होते हैं।
गुनिया/बरुआ
गांव में तांत्रिक क्रिया करने वाला जिसे 'पण्डा' भी कहते हैं।
निवास स्थान
- गोंड दुर्गम व पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं।
- इनके घर घास-फूस व मिट्टी के बने होते हैं।
गोंड जनजाति का निवास स्थान
खान-पान
- गोंड शाकाहारी व मांसाहारी दोनों होते हैं, इनका मुख्य खाद्य पदार्थ पेज है।
- इसके अलावा मक्का, ज्वार, गेहूं आदि का भी भोजन में प्रयोग होता है।
- महुआ को गोंड लोग देव अन्न मानते हैं।
वस्त्र एवं आभूषण
गोंड कम वस्त्रों का प्रयोग करते हैं। पुरूष सूती वस्त्र, लंगोटी व सिर पर पगड़ी पहनते हैं।
स्त्रियों में आभूषण व गोदना का प्रचलन है।
वर्तमान में इस जनजाति के लोग आधुनिक वस्त्रों का भी प्रयोग करने लगे है।


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