गोंड जनजाति
परिचय
गोंड समुदाय भारत की एक प्रमुख प्राचीन समुदाय है जोकि भारत के कटि प्रदेश-विंध्यपर्वत, सतपुड़ा पठार, छत्तीसगढ़ मैदान में दक्षिण तथा दक्षिण पश्चिम में गोदावरी नदी तक फैले हुए द्रविड़ परिवार का एक कबीला है।
विश्व के सबसे बड़े आदिवासी समूहों में से एक गोंड जनजाति है यह भारत की सबसे बड़ी जनजाति है।
यह मध्यप्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है।
यह जनजाति प्रोटो आस्ट्रेलायड प्रजाति समूह से संबंधित है।
भौगोलिक विस्तार
गोंड जनजाति पूरे मध्य प्रदेश में पाई जाती है विशेषकर नर्मदा व उसके दक्षिणी पूर्वी क्षेत्र में।
गोंड बहुल जिलों में बैतूल, छिंदवाड़ा, होशंगाबाद, बालाघाट, शहडोल, डिण्डोरी, सिवनी, मण्डला सागर आदि प्रमुख है।
जनसंख्या
- गोंड जनजाति भारत की सबसे बड़ी व मध्य प्रदेश की दूसरी बड़ी जनजाति है।
- गोंड जनजाति की जनसंख्या लगभग 50.93 लाख है जो प्रदेश की कुल जनजाति जनसंख्या का 33.25% है।
- गोंड जनजाति की सर्वाधिक संख्या मध्यप्रदेश के छिन्दवाड़ा जिले में 6.2 लाख है तथा इनकी साक्षरता दर 60.1% है।
उत्पत्ति
- गोंड शब्द की उत्पत्ति तेलगू के कोंड शब्द से हुई है जिसका अर्थ है- पर्वत।
- इन जनजातियों के पर्वतों में निवास करने के कारण इन्हें गोंड कहा जाता है।
- स्टीफन हिस्लॉप के अध्ययन को गोंड उत्पत्ति के संबंध में महत्वपूर्ण माना जाता है।
- मध्यप्रदेश के मांड निवासी काशीराम परधान की कथा गोंड उत्पत्ति के संबंध में महत्वपूर्ण है।
शारीरिक विशेषताएँ
गोंड द्रविड़ियन मूल के है।
गोंड जनजाति का कद सामान्यता छोटा, काला रंग बड़े होंठ, चपटी नाक व सीधे बाल वाले होते हैं।
गोंड स्वभाव से शर्मीले, सच्चे व विश्वसनीय होते हैं।


Comments
Comment करें